मकर संक्रांति पर केवल लड्डू ही नहीं, बल्कि भारत के विभिन्न हिस्सों में तिल-गुड़ से कई अन्य स्वादिष्ट उत्पाद (Delicious Products) भी तैयार किए जाते हैं। राजस्थान और हरियाणा में 'तिल की गजक' (Til Gajak) बहुत मशहूर है, जो अपनी कुरकुरी बनावट के लिए जानी जाती है। गजक को बनाने में बहुत मेहनत लगती है क्योंकि इसमें गुड़ और तिल के मिश्रण को बार-बार कुटा और फैलाया (Beaten and Spread) जाता है। यह सर्दियों की रातों में आग के पास बैठकर खाने वाला सबसे प्रिय स्नैक है।
दक्षिण भारत में 'तिल की बर्फी' और 'पिन्नी' (Sesame Barfi and Pinni) जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें खोया या मावा (Mava/Milk Solids) का भी प्रयोग होता है। महाराष्ट्र में 'तिल-गुड़ पोली' (Til-Gul Poli) एक विशेष प्रकार की मीठी रोटी है जिसे तिल और गुड़ के भरावन (Stuffing) के साथ बनाया जाता है। इसे शुद्ध घी के साथ गरमा-गरम परोसा जाता है, जो त्यौहार के भोजन (Festive Meal) का मुख्य आकर्षण होता है।
उत्तर भारत में 'रेवड़ी' (Rewri) का बहुत प्रचलन है, जो आकार में छोटी और सख्त होती है। ये छोटी-छोटी मीठी गोलियाँ बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। इसके अलावा, तिल का उपयोग करके 'खिचड़ी' (Khichdi) के साथ खाए जाने वाले विशेष अचार और चटनियाँ भी तैयार की जाती हैं। तिल को भूनकर और पीसकर उसे सब्जी की ग्रेवी (Gravy) में डालने से स्वाद और पोषण दोनों बढ़ जाते हैं।
आजकल के आधुनिक खान-पान में 'तिल-गुड़ ग्रेनोला' और 'कुकीज' (Granola and Cookies) जैसे फ्यूजन व्यंजन (Fusion Dishes) भी बनाए जा रहे हैं। ये व्यंजन पारंपरिक स्वाद को आधुनिक रूप (Modern Form) में पेश करते हैं, जो युवाओं को बहुत पसंद आते हैं। तिल और गुड़ का उपयोग स्मूदी और डेसर्ट (Smoothies and Desserts) में प्राकृतिक स्वीटनर के रूप में भी किया जा रहा है। यह बहुमुखी उपयोग (Versatile Use) इसे रसोई का एक अनिवार्य हिस्सा बनाता है।
चाहे वह तिल की खीर (Til Kheer) हो या तिल के नमकीन बिस्कुट, प्रत्येक व्यंजन का अपना एक सांस्कृतिक महत्व (Cultural Significance) है। संक्रांति का त्यौहार हमें इन पारंपरिक सामग्रियों के साथ प्रयोग करने और नई रेसिपी (New Recipes) खोजने का अवसर देता है। तिल-गुड़ के ये विविध रूप भारत की समृद्ध पाक विरासत (Culinary Heritage) को दर्शाते हैं। खुशियाँ बाँटने के लिए आप इनमें से कोई भी व्यंजन चुन सकते हैं।