भारत की सांस्कृतिक विविधता (Cultural Diversity) के कारण मकर संक्रांति की तिथि पर पूरे देश में अलग-अलग त्यौहारों की धूम रहती है। पंजाब और हरियाणा में इस तिथि से एक दिन पहले 'लोहड़ी' (Lohri) मनाई जाती है, जो नई फसल और अग्नि देव की पूजा का पर्व है। लोग लकड़ियों का ढेर जलाकर उसके चारों ओर नाचते हैं और मूंगफली व रेवड़ी (Peanuts and Rewri) का प्रसाद बांटते हैं। यह सामुदायिक प्रेम (Community Love) का एक सुंदर उदाहरण है।
दक्षिण भारत में, विशेषकर तमिलनाडु में, इस तिथि को 'पोंगल' (Pongal) के रूप में मनाया जाता है। यह चार दिनों का उत्सव है जिसमें इंद्र, सूर्य और मवेशियों (Cattle) की पूजा की जाती है। मिट्टी के नए बर्तनों में नए चावल का पोंगल पकाना समृद्धि और प्रचुरता (Prosperity and Abundance) का प्रतीक है। केरल में इसी समय 'मकरविलक्कू' (Makaravilakku) का त्यौहार मनाया जाता है, जहाँ सबरीमाला मंदिर में दिव्य ज्योति के दर्शन होते हैं।
असम में इस तिथि को 'माघ बीहू' (Magh Bihu) या भोगली बीहू के नाम से जाना जाता है। लोग बांस और सूखी घास से 'भेलाघर' (Temporary Shelters) बनाते हैं और सामूहिक भोज का आनंद लेते हैं। रात भर उत्सव मनाने के बाद सुबह उन्हें जला दिया जाता है और अग्नि देव से सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। यह उत्तर-पूर्वी भारत की समृद्ध लोक संस्कृति (Folk Culture) को प्रदर्शित करता है।
गुजरात और राजस्थान में यह तिथि अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव (International Kite Festival) के लिए प्रसिद्ध है। लोग अपनी छतों पर इकट्ठा होकर पतंगबाजी (Kite Flying) करते हैं और आसमान को रंग-बिरंगा बना देते हैं। तिल-गुड़ के लड्डू और 'उंधियू' जैसे विशेष व्यंजन (Special Dishes) इस दिन के स्वाद को बढ़ा देते हैं। यह उत्सव आपसी प्रतिस्पर्धा और भाईचारे (Brotherhood) का एक अनोखा संगम है।
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसे 'सुग्गी' (Suggi) या फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जहाँ लड़कियाँ एक-दूसरे को 'एल्लु-बेला' (Ellu-Bella) भेंट करती हैं। यह मिश्रण तिल, गुड़ और नारियल से बना होता है जो रिश्तों में मिठास (Sweetness in Relationships) लाने का काम करता है। चाहे नाम अलग हों, लेकिन इस तिथि का मूल संदेश एकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता (Gratitude toward Nature) ही है।