ब्रिटिश शासन (British Rule) के दौरान इस ऐतिहासिक मार्ग का नाम किंग्सवे (Kingsway) रखा गया था, जिसे स्वतंत्रता के बाद बदलकर राजपथ (Rajpath) कर दिया गया। भारत सरकार (Government of India) ने इसे गुलामी की मानसिकता (Colonial Mindset) से मुक्ति दिलाने के प्रतीक के रूप में कर्तव्य पथ (Kartavya Path) का नया नाम दिया। यह बदलाव केवल नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन प्रणाली में सेवा और उत्तरदायित्व (Responsibility) के भाव को दर्शाता है।
नया नाम नागरिकों और लोक सेवकों (Public Servants) को उनके संवैधानिक कर्तव्यों (Constitutional Duties) की याद दिलाता है। प्रधानमंत्री ने इस परिवर्तन को 'पंच प्राण' (Panch Pran) के संकल्पों से जोड़कर देखा है, जिसका उद्देश्य औपनिवेशिक अतीत को पीछे छोड़कर एक आत्मनिर्भर भारत (Self-reliant India) का निर्माण करना है। यह मार्ग अब सत्ता के प्रदर्शन के बजाय जनसेवा के प्रति समर्पण (Dedication) का प्रतीक बन गया है।
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना (Central Vista Redevelopment Project) के तहत इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प किया गया है। कर्तव्य पथ (Kartavya Path) पर अब अधिक सुविधाएं और बेहतर बुनियादी ढांचा (Infrastructure) मौजूद है, जो इसे पहले से अधिक सुलभ बनाता है। यहाँ आने वाले पर्यटक (Tourists) अब भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों (Democratic Values) को और अधिक करीब से महसूस कर सकते हैं।
ऐतिहासिक दृष्टि (Historical Perspective) से यह स्थान सदैव भारतीय राजनीति और प्रशासन का केंद्र रहा है। नाम बदलने की इस प्रक्रिया ने इसे एक नई पहचान (New Identity) दी है जो आधुनिक भारत की आकांक्षाओं से मेल खाती है। अब जब भी यहाँ गणतंत्र दिवस परेड (Republic Day Parade) आयोजित होती है, तो यह देश की संप्रभुता के साथ-साथ नागरिक कर्तव्यों का भी जयघोष करती है।
शहर के नियोजन (Urban Planning) में इस तरह के बदलाव सांस्कृतिक गौरव (Cultural Pride) को पुनर्स्थापित करने के लिए किए जाते हैं। कर्तव्य पथ (Kartavya Path) अब एक ऐसा स्थल है जहाँ राष्ट्र की विरासत और भविष्य की दृष्टि का संगम होता है। यह स्थान हर भारतीय को देश के प्रति अपने दायित्वों (Obligations) को निभाने के लिए प्रेरित करता रहता है।