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बीटिंग रिट्रीट समारोह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कर्णप्रिय धुनें (Melodious Tunes) हैं जो वातावरण को देशभक्ति के उत्साह से भर देती हैं। 'सारे जहाँ से अच्छा' (Saare Jahan Se Achha) इस समारोह की सबसे लोकप्रिय धुन है, जिसे इकबाल (Iqbal) ने लिखा था। इस धुन पर जब सेना के बैंड कदमताल करते हैं, तो विजय चौक का हर कोना राष्ट्रभक्ति (Patriotism) के सुरों से गूँज उठता है।

पारंपरिक रूप से 'अबाइड विद मी' (Abide with Me) नामक ईसाई भजन (Hymn) इस समारोह का अनिवार्य हिस्सा रहा है, जो महात्मा गांधी का प्रिय था। हाल के वर्षों में भारतीय मूल की धुनों (Indigenous Tunes) को प्राथमिकता दी गई है, जैसे 'ऐ मेरे वतन के लोगों' (Aye Mere Watan Ke Logon)। यह बदलाव भारतीय संगीत की महत्ता और स्वाभिमान (Self-respect) को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है।

विभिन्न रेजिमेंटल बैंड (Regimental Bands) अपनी विशिष्ट धुनें बजाते हैं, जिन्हें कुशल संगीतकारों (Composers) द्वारा मार्शल संगीत के रूप में तैयार किया जाता है। बिगुल (Bugle) और पाइप एवं ड्रम बैंड (Pipes and Drums) का तालमेल सुनने लायक होता है। प्रत्येक धुन की अपनी एक लय और गति (Tempo) होती है जो सैनिकों के मार्च पास्ट के साथ पूरी तरह से मेल खाती है।

समारोह में शामिल वाद्य यंत्रों (Instruments) में ट्रम्पेट, सैक्सोफोन और ढोलक जैसे उत्पादों (Products) का प्रयोग किया जाता है। भारतीय वायु सेना और नौसेना के बैंड अक्सर समकालीन धुनों (Contemporary Tunes) का भी समावेश करते हैं ताकि नई पीढ़ी इससे जुड़ाव महसूस कर सके। यह संगीत न केवल मनोरंजन है, बल्कि यह सैनिकों के मानसिक साहस (Mental Courage) और एकाग्रता का भी प्रतीक है।

सूर्यास्त के समय जब बिगुल वादक (Buglers) 'रिट्रीट' की धुन बजाते हैं, तो पूरा मैदान शांत हो जाता है। यह पल उन सभी अज्ञात शहीदों (Unsung Heroes) को समर्पित होता है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी है। संगीत के ये सुर राष्ट्र की अखंडता (Integrity) और एकता का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम बनते हैं।

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बीटिंग रिट्रीट समारोह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कर्णप्रिय धुनें (Melodious Tunes) हैं जो वातावरण को देशभक्ति के उत्साह से भर देती हैं। 'सारे जहाँ से अच्छा' (Saare Jahan Se Achha) इस समारोह की सबसे लोकप्रिय धुन है, जिसे इकबाल (Iqbal) ने लिखा था। इस धुन पर जब सेना के बैंड कदमताल करते हैं, तो विजय चौक का हर कोना राष्ट्रभक्ति (Patriotism) के सुरों से गूँज उठता है।

पारंपरिक रूप से 'अबाइड विद मी' (Abide with Me) नामक ईसाई भजन (Hymn) इस समारोह का अनिवार्य हिस्सा रहा है, जो महात्मा गांधी का प्रिय था। हाल के वर्षों में भारतीय मूल की धुनों (Indigenous Tunes) को प्राथमिकता दी गई है, जैसे 'ऐ मेरे वतन के लोगों' (Aye Mere Watan Ke Logon)। यह बदलाव भारतीय संगीत की महत्ता और स्वाभिमान (Self-respect) को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है।

विभिन्न रेजिमेंटल बैंड (Regimental Bands) अपनी विशिष्ट धुनें बजाते हैं, जिन्हें कुशल संगीतकारों (Composers) द्वारा मार्शल संगीत के रूप में तैयार किया जाता है। बिगुल (Bugle) और पाइप एवं ड्रम बैंड (Pipes and Drums) का तालमेल सुनने लायक होता है। प्रत्येक धुन की अपनी एक लय और गति (Tempo) होती है जो सैनिकों के मार्च पास्ट के साथ पूरी तरह से मेल खाती है।

समारोह में शामिल वाद्य यंत्रों (Instruments) में ट्रम्पेट, सैक्सोफोन और ढोलक जैसे उत्पादों (Products) का प्रयोग किया जाता है। भारतीय वायु सेना और नौसेना के बैंड अक्सर समकालीन धुनों (Contemporary Tunes) का भी समावेश करते हैं ताकि नई पीढ़ी इससे जुड़ाव महसूस कर सके। यह संगीत न केवल मनोरंजन है, बल्कि यह सैनिकों के मानसिक साहस (Mental Courage) और एकाग्रता का भी प्रतीक है।

सूर्यास्त के समय जब बिगुल वादक (Buglers) 'रिट्रीट' की धुन बजाते हैं, तो पूरा मैदान शांत हो जाता है। यह पल उन सभी अज्ञात शहीदों (Unsung Heroes) को समर्पित होता है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी है। संगीत के ये सुर राष्ट्र की अखंडता (Integrity) और एकता का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम बनते हैं।
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