गणतंत्र दिवस की परेड में सबसे गौरवशाली क्षण वह होता है जब राष्ट्रपति (President) तिरंगा फहराते हैं और उसके बाद 21 तोपों की सलामी (21-gun Salute) दी जाती है। यह सलामी राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च सम्मान (Highest Honor) व्यक्त करने का एक तरीका है। दिलचस्प बात यह है कि यह सलामी वास्तव में तोपों से नहीं, बल्कि सेना की '75 एमएम गन' (75mm Guns) नामक विशेष आर्टिलरी (Artillery) गन द्वारा दी जाती है, जिन्हें फील्ड गन भी कहा जाता है।
इस प्रक्रिया का समय बहुत ही सटीक (Precise) होता है, जिसे राष्ट्रगान (National Anthem) की धुन के साथ जोड़ा जाता है। जैसे ही राष्ट्रगान शुरू होता है, पहली तोप दागी जाती है और ठीक 52 सेकंड के भीतर आखिरी गोला छोड़ा जाता है। इस तालमेल (Coordination) को बनाए रखने के लिए सेना के जवान कड़ा अभ्यास करते हैं। यह अनुशासन और सैन्य शक्ति (Military Power) का एक अद्भुत प्रदर्शन होता है जो दर्शकों में जोश भर देता है।
इतिहास के नजरिए से देखें तो यह परंपरा औपनिवेशिक काल (Colonial Period) से चली आ रही है, लेकिन स्वतंत्र भारत में इसे राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बना दिया गया। पुराने समय में सात तोपों की सलामी दी जाती थी, लेकिन नौसेना (Navy) की परंपराओं के प्रभाव के कारण बाद में इसकी संख्या 21 कर दी गई। आज यह सलामी केवल गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आगमन जैसे विशेष राजकीय समारोहों (State Functions) तक ही सीमित है।
सलामती की इस प्रक्रिया में आठ तोपों का एक सेट इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें से सात तोपें गोले दागती हैं और एक को आरक्षित (Reserve) रखा जाता है। प्रत्येक तोप से तीन-तीन गोले छोड़े जाते हैं ताकि कुल संख्या 21 पूरी हो सके। इन गोलों में केवल बारूद (Gunpowder) होता है और कोई प्रोजेक्टाइल नहीं होता, जिससे केवल धमाके की आवाज सुनाई देती है। यह आवाज भारत की संप्रभुता (Sovereignty) की घोषणा की तरह गूँजती है।
जब पूरा कर्तव्य पथ (Kartavya Path) इन तोपों की गूँज से भर जाता है, तो वह क्षण हर भारतीय के मन में देशभक्ति (Patriotism) का संचार करता है। यह परंपरा हमें अपने रक्षा बलों की सतर्कता और राष्ट्र की गरिमा की याद दिलाती है। तोपों की यह सलामी केवल एक शोर नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic) की शक्ति और उसके सम्मान का प्रतीक है जो पूरी दुनिया को हमारी मजबूती का संदेश देता है।