स्वामी दयानंद के विचार (Swami Dayanand's Thoughts) आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वे उन्नीसवीं सदी में थे, क्योंकि वे सार्वभौमिक सत्यों (Universal Truths) पर आधारित हैं। भ्रष्टाचार और अनैतिकता (Corruption and Immorality) जैसी समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने 'सत्य भाषण' और 'पवित्र आचरण' का मार्ग बताया। उनका मानना था कि जब तक व्यक्ति का चरित्र (Character) ऊंचा नहीं होगा, तब तक कोई भी कानून देश की स्थिति नहीं सुधार सकता। उनके विचार हमें व्यक्तिगत ईमानदारी (Personal Honesty) और सामाजिक उत्तरदायित्व का पाठ पढ़ाते हैं।
पर्यावरण और स्वास्थ्य (Environment and Health) के प्रति उनकी दृष्टि बहुत वैज्ञानिक थी। उन्होंने यज्ञ और हवन (Yajna and Havan) के माध्यम से वायु शुद्धि और औषधीय गुणों के प्रसार की बात की। स्वामी दयानंद के विचार (Swami Dayanand's Thoughts) हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर सादगीपूर्ण जीवन (Simple Living) जीने की सीख देते हैं। आज की उपभोक्तावादी संस्कृति (Consumerist Culture) में जहाँ तनाव बढ़ रहा है, उनकी योग और प्राणायाम (Yoga and Pranayama) की शिक्षाएं मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं। वे स्वदेशी (Indigenous) उत्पादों के उपयोग के प्रबल समर्थक थे, जो आज के 'आत्मनिर्भर भारत' का मूल मंत्र है।
धार्मिक कट्टरता और सांप्रदायिकता (Communalism) को मिटाने के लिए उन्होंने 'विश्व बंधुत्व' (Universal Brotherhood) का संदेश दिया। स्वामी दयानंद के विचार (Swami Dayanand's Thoughts) किसी एक संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण (Welfare of Humanity) के लिए थे। उन्होंने सिखाया कि धर्म वही है जो सबको साथ लेकर चले और जिसमें किसी के प्रति घृणा न हो। उनके विचार हमें संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर राष्ट्रहित (National Interest) को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देते हैं। यह एकता आज के विभाजित समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।
नारी अधिकार और सुरक्षा (Women's Rights and Safety) के मामले में उनके विचार अत्यंत आधुनिक थे। उन्होंने लड़कियों के लिए समान शिक्षा (Equal Education) और विधवा विवाह का समर्थन करके समाज की आधी आबादी को सम्मान दिलाया। स्वामी दयानंद के विचार (Swami Dayanand's Thoughts) हमें सिखाते हैं कि एक सशक्त राष्ट्र के लिए महिलाओं का शिक्षित और स्वतंत्र होना अनिवार्य है। आज जब हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो महर्षि दयानंद के सिद्धांत ही हमारा आधार बनते हैं।
लोकतंत्र और सुशासन (Democracy and Good Governance) के संदर्भ में उन्होंने 'राजा' या शासक को प्रजा का सेवक और धर्मनिष्ठ (Religious/Ethical) होने की सलाह दी। स्वामी दयानंद के विचार (Swami Dayanand's Thoughts) स्पष्ट करते हैं कि सत्ता का उपयोग केवल जन-कल्याण (Public Welfare) के लिए होना चाहिए। उन्होंने स्वराज्य (Self-rule) की जो अवधारणा दी, वह केवल राजनीतिक आजादी नहीं, बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता (Cultural Freedom) भी थी। महर्षि दयानंद सरस्वती के इन विचारों को अपनाकर ही भारत पुनः 'विश्व गुरु' के पद पर आसीन हो सकता है।