ऋषिकेश के समीप स्थित नीलकंठ महादेव (Neelkanth Mahadev) मंदिर उस स्थान पर बना है जहाँ भगवान शिव ने समुद्र मंथन (Ocean Churning) से निकले कालकूट विष (Poison) का पान किया था। सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए महादेव ने उस विष को अपने कंठ में ही रोक लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया। इसी कारण उन्हें नीलकंठ (Neelkanth) नाम से पुकारा जाने लगा। यह मंदिर उनकी इसी त्याग और परोपकार (Altruism) की भावना का प्रतीक है। यहाँ दर्शन करने मात्र से भक्त के भीतर की नकारात्मकता और जहर रूपी बुराइयाँ समाप्त हो जाती हैं।
पहाड़ियों के बीच स्थित नीलकंठ महादेव (Neelkanth Mahadev) मंदिर की वास्तुकला अत्यंत मनमोहक है, जहाँ समुद्र मंथन के दृश्यों को दीवारों पर उकेरा गया है। भक्त यहाँ अपनी मनोकामनाएं (Wishes) लेकर आते हैं और शिवलिंग पर गंगाजल (Ganga Water) अर्पित करते हैं। मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण शांति (Peace) और एकांत प्रदान करता है, जो ध्यान लगाने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। सावन के महीने में कांवड़ियों (Kanwariyas) की यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है, जो उनकी अटूट श्रद्धा (Unwavering Devotion) को दर्शाती है।
धार्मिक दृष्टि से नीलकंठ महादेव (Neelkanth Mahadev) का दर्शन करना पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। यहाँ की गई पूजा से जातक की कुंडली के विष योग और अन्य दोषों का प्रभाव कम होता है। मंदिर में अखंड ज्योति (Eternal Lamp) का जलना भगवान की निरंतर उपस्थिति का अनुभव कराता है। भक्त यहाँ आकर महादेव से कठिन समय में धैर्य और शक्ति (Strength) की प्रार्थना करते हैं। यह स्थान उन लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो समाज कल्याण (Social Welfare) के लिए कार्य करना चाहते हैं।
नीलकंठ महादेव (Neelkanth Mahadev) की यात्रा दुर्गम रास्तों और घने जंगलों से होकर गुजरती है, जो भक्त की परीक्षा और तपस्या (Penance) का हिस्सा है। मंदिर परिसर में बजने वाले घंटे और मंत्रों की गूँज एक दिव्य वातावरण (Divine Atmosphere) निर्मित करती है। यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु महादेव की महिमा के गीतों में खो जाता है। विष का पान करने वाले शिव हमें सिखाते हैं कि बुराइयों को पचाकर ही अमृत (Nectar) की प्राप्ति संभव है। यह दर्शन जीवन जीने की एक गहरी कला (Art of Living) सिखाता है।
भक्तों का विश्वास है कि नीलकंठ महादेव (Neelkanth Mahadev) के दर्शन के बिना ऋषिकेश की यात्रा अधूरी है। भगवान शिव यहाँ शांत मुद्रा में विराजमान हैं और अपने भक्तों के सभी दुखों (Sufferings) को हर लेते हैं। मंदिर के पास बहने वाली नदियाँ इसकी पवित्रता को और बढ़ा देती हैं। यहाँ की यात्रा मानसिक शांति और आध्यात्मिक जागृति (Spiritual Awakening) का मार्ग प्रशस्त करती है। महादेव की यह शरण स्थली वास्तव में शांति और भक्ति का केंद्र है।