भगवान शिव को महादेव आशुतोष (Mahadev Aashutosh) के नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि वे बहुत शीघ्र प्रसन्न होने वाले (Easily Pleased) देवता हैं। 'आशु' का अर्थ है शीघ्र और 'तोष' का अर्थ है संतुष्ट होना, जो उनकी दयालुता और उदारता (Generosity) को प्रदर्शित करता है। जहाँ अन्य देवताओं को प्रसन्न करने के लिए कठिन अनुष्ठान करने पड़ते हैं, वहीं महादेव केवल एक लोटा जल और बेलपत्र (Bael Leaves) चढ़ाने मात्र से अपने भक्तों पर अपनी कृपा बरसा देते हैं। उनकी यही सरलता उन्हें सभी देवों में श्रेष्ठ बनाती है।
महादेव आशुतोष (Mahadev Aashutosh) की महिमा निराली है क्योंकि वे अपने भक्तों के अवगुणों को दरकिनार कर उनकी भक्ति (Devotion) को देखते हैं। चाहे वह राक्षस राज रावण हो या भस्मासुर, उन्होंने सबकी पुकार सुनी और उन्हें वरदान दिए। उनकी उपासना (Worship) में किसी महंगे चढ़ावे या आडंबर की आवश्यकता नहीं होती। वे केवल मन की शुद्धता और निस्वार्थ प्रेम (Unselfish Love) के भूखे हैं। यही कारण है कि गरीब हो या अमीर, हर कोई अपनी क्षमता अनुसार उन्हें रिझा लेता है।
भक्तों के कष्टों को तुरंत हरने के कारण उन्हें महादेव आशुतोष (Mahadev Aashutosh) के रूप में पूजा जाता है। जब सृष्टि पर संकट आता है, तो वे हलाहल विष (Poison) पीकर नीलकंठ बन जाते हैं। उनकी उपासना से व्यक्ति को मानसिक शांति (Mental Peace) और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। जो लोग प्रतिदिन "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता और रोग (Diseases) कोसों दूर रहते हैं। उनकी शरण में आने वाला कोई भी जीव कभी खाली हाथ वापस नहीं लौटता।
वर्तमान युग की आपाधापी में महादेव आशुतोष (Mahadev Aashutosh) का स्वरूप हमें संतोष और वैराग्य (Detachment) सिखाता है। वे श्मशान में वास करते हैं और बाघ की खाल (Tiger Skin) धारण करते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि सांसारिक सुख नश्वर हैं। उनकी उपासना हमें मृत्यु के भय से मुक्त कर जीवन के वास्तविक अर्थ (True Meaning of Life) को समझने की शक्ति प्रदान करती है। वे स्वयं महायोगी हैं, जो ध्यान (Meditation) के माध्यम से संपूर्ण ब्रह्मांड का नियंत्रण करते हैं।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर महादेव आशुतोष (Mahadev Aashutosh) का रुद्राभिषेक (Rudrabhishek) करना अत्यंत फलदायी माना गया है। दूध, गंगाजल, शहद और गन्ने के रस से किया गया अभिषेक भक्त की दरिद्रता का नाश करता है। उनकी भक्ति में लीन रहने वाला व्यक्ति सांसारिक बाधाओं (Obstacles) को हंसते-हंसते पार कर लेता है। वे वास्तव में करुणा के सागर हैं, जो अपने भक्तों के जीवन में खुशियों का प्रकाश भर देते हैं। उनकी कृपा पाने के लिए केवल एक निर्मल हृदय (Pure Heart) ही पर्याप्त है।