रायगढ़, राजगढ़ और शिवनेरी जैसे ऐतिहासिक किलों पर शिवजयंती उत्सव (Celebration on Forts) मनाने का अनुभव अत्यंत रोमांचकारी और आध्यात्मिक होता है। हज़ारों लोग नंगे पैर चढ़ाई करके किलों के शिखर पर पहुँचते हैं ताकि वे महाराज की जन्मस्थली या कर्मस्थली पर श्रद्धासुमन अर्पित कर सकें। इस अवसर पर किलों को रोशनी (Illumination) से सजाया जाता है और पारंपरिक 'पालकी यात्रा' निकाली जाती है। किलों पर शिवजयंती उत्सव (Celebration on Forts) मनाना एक जीवित इतिहास (Living History) का अनुभव करने जैसा है।
भीड़ के प्रबंधन (Crowd Management) के लिए पुरातत्व विभाग (Archaeological Department) और स्थानीय प्रशासन विशेष दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी करते हैं। किलों की संकरी सीढ़ियों और ऊंची दीवारों पर सुरक्षा के लिए रस्सियाँ और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाती है। प्लास्टिक के उपयोग और धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) लगाया जाता है ताकि किलों की पवित्रता और पर्यावरण (Environment) सुरक्षित रहे। किलों पर शिवजयंती उत्सव (Celebration on Forts) के दौरान कचरा न फैलाने की अपील भी की जाती है।
आपातकालीन स्थिति (Emergency Situation) से निपटने के लिए किलों पर चिकित्सा दल और एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाती है। भारी वाहनों की पार्किंग के लिए किलों की तलहटी में विशेष क्षेत्र (Special Zones) बनाए जाते हैं ताकि रास्तों पर जाम न लगे। किलों पर शिवजयंती उत्सव (Celebration on Forts) के दौरान ड्रोन कैमरों के उपयोग के लिए भी विशेष अनुमति (Special Permission) अनिवार्य होती है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि उत्सव भव्य हो लेकिन स्मारकों को कोई क्षति न पहुँचे।
स्थानीय मावलों और दुर्ग प्रेमियों के समूह किलों पर शिवजयंती उत्सव (Celebration on Forts) के समय स्वच्छता अभियान (Cleanliness Drive) चलाते हैं। वे आने वाले पर्यटकों को किलों के इतिहास और उनके स्थापत्य (Architecture) के बारे में जानकारी देते हैं। यह सहभागिता ऐतिहासिक स्थलों के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बढ़ाती है। किलों पर रात के समय रुकने और कैंपिंग करने के लिए भी कुछ विशेष प्रतिबंध (Restrictions) लगाए जाते हैं ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो।
उत्सव के दौरान 'गढ़ संवर्धन' (Fort Conservation) के लिए दान इकट्ठा किया जाता है, जिसका उपयोग किलों की मरम्मत और रख-रखाव (Maintenance) में होता है। किलों पर शिवजयंती उत्सव (Celebration on Forts) हमें अपनी वास्तुकला विरासत (Architectural Heritage) के करीब लाता है और हमें यह अहसास कराता है कि ये पत्थर केवल इमारतें नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के पराक्रम के गवाह हैं। यह उत्सव प्रकृति और इतिहास के प्रति हमारे सम्मान को पुनर्जीवित करता है।