ईद-उल-फितर की नमाज़ (Prayer of Eid-ul-Fitr) पढ़ना हर मुसलमान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और यह सामान्य नमाज़ों से थोड़ी अलग होती है। इसमें दो रकात पढ़ी जाती हैं जिनमें कुल छह अतिरिक्त तकबीरें (Six Additional Takbirs) कही जाती हैं। पहली रकात में 'सना' पढ़ने के बाद इमाम के साथ तीन तकबीरें कही जाती हैं, जिसमें हर बार हाथ कान तक उठाकर छोड़ दिए जाते हैं। यह नमाज़ (Namaz) केवल जमात के साथ ही पढ़ी जा सकती है, इसे अकेले घर पर नहीं पढ़ा जा सकता।
नमाज़ के दौरान इमाम साहब सूरह फातिहा (Surah Fatiha) और क़ुरआन की आयतों की तिलावत करते हैं। दूसरी रकात में रुकू में जाने से पहले फिर से तीन अतिरिक्त तकबीरें (Extra Takbirs) कही जाती हैं। नमाज़ मुकम्मल होने के बाद इमाम द्वारा 'खुतबा' (Sermon) दिया जाता है, जिसे सुनना हर नमाज़ी के लिए सुन्नत है। खुतबे में ईद की महत्ता और सामाजिक जिम्मेदारियों (Social Responsibilities) पर प्रकाश डाला जाता है। यह पूरी प्रक्रिया अनुशासन और सामूहिक निष्ठा को प्रदर्शित करती है।
नमाज़ के समापन पर सामूहिक दुआ (Collective Dua) मांगी जाती है जिसमें देश की उन्नति और बीमारों की शफ़ा (Healing) के लिए इल्तिजा की जाती है। लोग एक-दूसरे से मुसाफ़ा और गले मिलते हैं जो प्रेम (Affection) का प्रतीक है। ईदगाहों में नमाज़ियों की विशाल भीड़ अनुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है। नमाज़ के लिए जाते समय और वापस आते समय अलग-अलग रास्तों का उपयोग करना सुन्नत-ए-नबवी (Prophetic Sunnah) माना जाता है।
ईद की नमाज़ (Eid Prayer) के लिए घर से निकलने से पहले गुसल करना, साफ़-सुथरे या नए लिबास पहनना और कुछ मीठा खाना बेहतर माना जाता है। नमाज़ पर जाने से पहले तकबीरें पढ़ना रूहानी सुकून (Spiritual Peace) प्रदान करता है। यह नमाज़ हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की बारगाह में सब बराबर हैं। नमाज़ के बाद का दृश्य अत्यंत भावुक होता है जब अनजान लोग भी एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं।
प्रशासन द्वारा भी ईद की नमाज़ (Eid Namaz) के लिए सुरक्षा और यातायात के विशेष प्रबंध किए जाते हैं। स्वयंसेवक (Volunteers) सड़कों पर सफ बिछाने और नमाज़ियों की सहायता करने में जुटे रहते हैं। यह दिन एकता और संगठन (Organization) की शक्ति को दर्शाता है। नमाज़ के बाद लोग अपने उन रिश्तेदारों के घर भी जाते हैं जिनसे लंबे समय से मुलाकात नहीं हुई होती। यह आध्यात्मिक मिलन का एक महान अवसर है।