जैन धर्म में रथ यात्रा (Rath Yatra) का आयोजन किसी उत्सव को दिव्यता प्रदान करने के लिए किया जाता है। इस दौरान निकलने वाली झाँकियाँ (Tableaus) केवल कला का प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि वे जैन इतिहास और दर्शन (History and Philosophy) को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं। इन झाँकियों के माध्यम से माता त्रिशला के सोलह स्वप्न (Sixteen Dreams), महावीर स्वामी की तपस्या और उनके केवल ज्ञान की घटनाओं को दिखाया जाता है। यह एक मूक फिल्म की तरह होती है जो दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती है।
धार्मिक रूप से इन झाँकियों (Tableaus) का दर्शन करना पुण्यकारी माना गया है क्योंकि ये भगवान के आदर्शों को याद दिलाती हैं। बच्चे और युवा इन झाँकियों को देखकर अपने महापुरुषों के त्याग और संघर्ष (Sacrifice and Struggle) को समझते हैं। सांस्कृतिक दृष्टि से ये झाँकियाँ भारतीय लोक कला और कारीगरी (Folk Art and Craftsmanship) का प्रतिनिधित्व करती हैं। रंगों और वस्त्रों का चयन इतना सटीक होता है कि दर्शक स्वयं को उस प्राचीन काल में महसूस करने लगते हैं।
रथ यात्रा जैन (Rath Yatra Jain Festival) उत्सव में झाँकियाँ समाज के विभिन्न अंगों के बीच सहयोग का प्रतीक हैं। कलाकार और श्रद्धालु महीनों तक इन झाँकियों को बनाने में मेहनत करते हैं। कुछ झाँकियाँ सामाजिक बुराइयों जैसे नशा और हिंसा (Drugs and Violence) के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के लिए भी बनाई जाती हैं। यह कला के माध्यम से धर्म के प्रचार का एक बहुत ही सरल और प्रभावी तरीका (Effective Method) है। झाँकियों की भव्यता उत्सव के उत्साह को कई गुना बढ़ा देती है।
इन झाँकियों में अक्सर भगवान महावीर के 'अहिंसा परमो धर्म' (Non-violence is the supreme religion) के संदेश को प्रमुखता दी जाती है। जीव रक्षा और पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection) जैसे विषयों पर आधारित झाँकियाँ लोगों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराती हैं। जब ये झाँकियाँ सड़कों से गुजरती हैं, तो हज़ारों लोग एक साथ धर्म के प्रति अपनी आस्था (Faith) प्रकट करते हैं। यह दृश्य मन को शांति और गौरव से भर देता है।
अंततः रथ यात्रा (Rath Yatra) की ये झाँकियाँ हमारी गौरवशाली विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य करती हैं। ये हमें सिखाती हैं कि धर्म केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि आचरण और कला (Conduct and Art) में भी बसता है। झाँकियों का यह सिलसिला उत्सव की समाप्ति के बाद भी लोगों की स्मृतियों में बना रहता है। यह एक सामूहिक उत्सव है जो भक्ति के साथ-साथ रचनात्मकता (Creativity) को भी बढ़ावा देता है।