हज़रत अली (Hazarat Ali) का जन्म इस्लामी इतिहास की एक अत्यंत अद्वितीय घटना मानी जाती है क्योंकि उनका जन्म मक्का में पवित्र काबा (Kaaba) के भीतर हुआ था। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, रजब महीने की 13 तारीख (13th of Rajab) को उनकी माता फ़ातिमा बिन्त असद पवित्र काबा की दीवार के पास प्रार्थना कर रही थीं, जब वह दीवार चमत्कारिक रूप से खुल गई। यह सम्मान किसी और महान व्यक्तित्व को प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए उन्हें 'मौलुद-ए-काबा' (Born in Kaaba) के नाम से भी जाना जाता है। उनके जन्म का यह स्थान उनकी रूहानी पाकीज़गी और अल्लाह के प्रति उनकी निकटता का सबसे बड़ा प्रमाण (Proof) माना जाता है।
दुनिया भर के मुसलमान इस दिन को बहुत ही श्रद्धा और खुशी (Devotion and Joy) के साथ मनाते हैं। हज़रत अली के जन्मदिन (Hazarat Ali's Birthday) पर मस्जिदों और इमामबाड़ों को रोशनी (Lighting) से सजाया जाता है और विशेष महफ़िलें आयोजित की जाती हैं। लोग उनके जन्म की इस घटना को उनके महान चरित्र और उनके आने वाले जीवन के मार्गदर्शक (Guide) के रूप में देखते हैं। यह दिन केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह ईश्वर की असीमित शक्ति और चमत्कार (Miracle) को याद करने का भी एक माध्यम है।
हज़रत अली (Ali ibn Abi Talib) के जन्म की इस विशेषता के कारण, उनके चाहने वाले उन्हें एक महान रूहानी पेशवा (Spiritual Leader) के रूप में देखते हैं। काबा के भीतर जन्म लेना इस बात का संकेत था कि उनका पूरा जीवन अल्लाह की इबादत और सत्य की रक्षा (Protection of Truth) के लिए समर्पित होगा। उनके जन्म के समय पैगंबर मोहम्मद (Prophet Muhammad) ने उन्हें अपनी गोद में लिया था, जिससे उनके और पैगंबर के बीच के अटूट संबंध की नींव पड़ी। यह रूहानी रिश्ता (Spiritual Bond) पूरे इस्लामी इतिहास का आधार बना।
भारत, ईरान और इराक जैसे देशों में इस दिन सार्वजनिक सभाएं (Public Gatherings) होती हैं जहाँ उनके जन्म के प्रसंगों का वर्णन किया जाता है। विद्वान इस बात पर ज़ोर देते हैं कि कैसे एक पवित्र स्थान पर जन्म लेने वाले बालक ने पूरी मानवता को ज्ञान और न्याय (Knowledge and Justice) का पाठ पढ़ाया। लोग अपने घरों में नज़र-ओ-नियाज़ (Offerings) करते हैं और इस खुशी के अवसर पर मीठे पकवान बांटते हैं। हज़रत अली का जन्मदिन (Ali's Birthday) एक आध्यात्मिक जागृति का दिन है जो दिलों को रोशन करता है।
जन्म की यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि महान व्यक्तित्वों का आगमन दिव्य संकेतों (Divine Signs) के साथ होता है। हज़रत अली के जन्म स्थान की गरिमा ने उन्हें बचपन से ही एक विशेष सम्मान प्रदान किया। आज भी जब श्रद्धालु काबा के दर्शन (Pilgrimage of Kaaba) के लिए जाते हैं, तो वे उस दीवार को याद करते हैं जहाँ से अली का नूर दुनिया में आया था। यह इतिहास का वह सुनहरा पन्ना है जो सदियों बाद भी अपनी चमक और प्रेरणा (Inspiration) बनाए हुए है।