ईस्टर के उत्सव में संगीत और भजनों (Hymns) का बहुत बड़ा योगदान होता है। 'क्राइस्ट द लॉर्ड इज राइज टुडे' (Christ the Lord is Risen Today) जैसे प्रसिद्ध भजन पूरी दुनिया में गाए जाते हैं। इन भजनों के शब्द विजय, गौरव और ईश्वरीय शक्ति (Divine Power) का वर्णन करते हैं। जब पूरा चर्च एक साथ इन गीतों को गाता है, तो एक बहुत ही शक्तिशाली वातावरण निर्मित होता है।
भजनों का मुख्य उद्देश्य ईश्वर के प्रति कृतज्ञता (Gratitude) प्रकट करना और मुक्ति (Salvation) के संदेश को फैलाना है। इन गीतों की धुन आमतौर पर बहुत ही आनंदमयी और उत्साहजनक होती है। भारत में स्थानीय भाषाओं जैसे हिंदी, तमिल और मलयालम में भी बहुत सुंदर ईस्टर गीत रचे गए हैं। ये गीत सीधे भक्तों के हृदय (Heart) को छूते हैं और उनके विश्वास को दृढ़ करते हैं।
संगीत के माध्यम से कठिन धार्मिक सिद्धांतों को सरल तरीके से समझाया जा सकता है। भजनों में उपयोग किए गए शब्द (Lyrics) यीशु मसीह के बलिदान और उनकी पुनः प्राप्ति की कहानी बताते हैं। इससे बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति और धर्म के बारे में गहराई से जानने का मौका मिलता है। भक्ति संगीत (Devotional Music) तनाव कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी सहायक होता है।
चर्च का क्वायर (Church Choir) हफ़्तों पहले से इन भजनों का अभ्यास करता है। विभिन्न वाद्य यंत्रों (Musical Instruments) जैसे पियानो, गिटार और ड्रम का उपयोग संगीत में निखार लाता है। कई बार विशेष संगीत कार्यक्रम (Music Concerts) भी आयोजित किए जाते हैं जहाँ ईस्टर की थीम पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत की जाती हैं। यह कलात्मक अभिव्यक्ति (Artistic Expression) का एक रूप है।
भजन गाते समय जो सामूहिक एकता का अनुभव होता है, वह अद्वितीय है। यह भक्तों के बीच के मतभेदों को मिटाकर उन्हें एक सूत्र में पिरो देता है। इन गीतों की गूँज चर्च की दीवारों से बाहर तक जाती है, जो दुनिया को शांति और प्रेम का संदेश (Message of Peace and Love) देती है। ईस्टर के ये भजन वास्तव में उत्सव की आत्मा होते हैं।