आंगनवाड़ी कर्मियों को मिलने वाला आर्थिक लाभ (Economic Benefit) मानदेय (Honorarium) कहलाता है, जो उनकी सेवाओं के बदले सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। केंद्र सरकार (Central Government) और राज्य सरकार (State Government) दोनों मिलकर इस राशि का भुगतान करती हैं। वर्तमान में विभिन्न राज्यों में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (Anganwadi Worker) को 8,000 से 12,000 रुपये के बीच मानदेय मिलता है। वहीं सहायिका (Helper) का मानदेय इससे थोड़ा कम, लगभग 4,000 से 6,000 रुपये के आसपास निर्धारित होता है।
नियमित मानदेय (Regular Honorarium) के अलावा कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (Performance Based Incentive) भी दिया जाता है। यदि आप पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker) ऐप पर बच्चों के वजन और स्वास्थ्य का डेटा (Data) समय पर अपडेट करती हैं, तो आपको अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि (Incentive Money) मिलती है। यह डिजिटल कार्य (Digital Work) को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। मोबाइल रिचार्ज (Mobile Recharge) और इंटरनेट खर्च (Internet Expenses) के लिए भी सरकार अलग से मासिक भत्ता (Monthly Allowance) प्रदान करती है।
विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों (Health Programs) जैसे टीकाकरण (Vaccination) अभियान या पल्स पोलियो (Pulse Polio) में ड्यूटी करने पर अतिरिक्त मानदेय (Extra Honorarium) मिलता है। चुनाव ड्यूटी (Election Duty) या जनगणना (Census) जैसे कार्यों के लिए भी सरकार अलग से पारिश्रमिक (Remuneration) तय करती है। यह अतिरिक्त आय (Extra Income) उनके कठिन परिश्रम को आर्थिक मजबूती प्रदान करती है। त्योहारों के अवसर पर भी कुछ राज्यों में विशेष बोनस (Bonus) या अनुग्रह राशि देने का प्रावधान किया गया है।
सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के तहत, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बीमा योजनाएं (Insurance Schemes) भी लागू की गई हैं। किसी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में आर्थिक सहायता (Financial Assistance) दी जाती है। मानदेय (Honorarium) का भुगतान सीधे बैंक खाते (Bank Account) में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer - DBT) के माध्यम से किया जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और पूरी राशि पारदर्शी (Transparent) तरीके से महिला कर्मियों तक पहुँचती है।
समय-समय पर महंगाई (Inflation) को देखते हुए सरकार मानदेय में वृद्धि (Increment) की घोषणा भी करती रहती है। कई राज्यों में अनुभव (Experience) के आधार पर वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment) का भी नियम बनाया गया है। यह मानदेय (Honorarium) न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर (Self-reliant) बनाता है बल्कि उन्हें समाज सेवा के प्रति और अधिक समर्पित रहने की प्रेरणा भी देता है। आर्थिक स्थिरता (Financial Stability) आने से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) को नया आयाम मिल रहा है।