पटवारी बनने की चयन प्रक्रिया मुख्य रूप से एक राज्य स्तरीय लिखित परीक्षा (Written Examination) के माध्यम से संपन्न होती है। यह परीक्षा प्रायः वस्तुनिष्ठ (Objective Type) होती है, जिसमें बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाते हैं। कुछ राज्यों में प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) और मुख्य परीक्षा (Mains) के दो चरण हो सकते हैं, जबकि कई स्थानों पर केवल एक ही परीक्षा के आधार पर मेरिट बनाई जाती है।
लिखित परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) की प्रक्रिया के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस चरण में आपके शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और मूल निवास जैसे सभी दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाती है। यदि किसी दस्तावेज़ में विसंगति पाई जाती है, तो उम्मीदवार की पात्रता (Candidature) निरस्त की जा सकती है, अतः कागजी तैयारी पूर्ण रखनी चाहिए।
दस्तावेज़ सत्यापन के पश्चात एक अंतिम वरीयता सूची (Final Merit List) तैयार की जाती है, जो लिखित परीक्षा के अंकों पर आधारित होती है। जिन पदों पर कंप्यूटर टाइपिंग या कौशल परीक्षा (Skill Test) की आवश्यकता होती है, वहां अभ्यर्थियों को कंप्यूटर पर अपनी गति और शुद्धता का प्रदर्शन करना होता है। इस परीक्षा के अंक अंतिम परिणाम में जुड़ भी सकते हैं या यह केवल क्वालीफाइंग (Qualifying) प्रकृति की हो सकती है।
चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति से पूर्व अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण (Medical Examination) से गुजरना होता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उम्मीदवार पद की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम है। स्वास्थ्य मानकों पर खरा उतरने के बाद ही अंतिम नियुक्ति आदेश (Appointment Order) जारी किए जाते हैं और पदस्थापना की जाती है।
नियुक्ति के उपरांत पटवारी को एक निश्चित समय के लिए राजस्व प्रशिक्षण (Revenue Training) प्राप्त करना होता है। इस दौरान उन्हें भूमि कानूनों, सर्वेक्षण विधियों और रिकॉर्ड प्रबंधन (Record Management) का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद ही उन्हें स्वतंत्र रूप से किसी तहसील या हल्के (Circle) का कार्यभार सौंपा जाता है।