लिखित परीक्षा के समापन के बाद विभाग द्वारा प्रारंभिक उत्तर कुंजी (Answer Key) जारी की जाती है, जिस पर आपत्तियां (Objections) मांगी जाती हैं। सभी शंकाओं के समाधान के बाद अंतिम परिणाम (Final Result) घोषित किया जाता है, जिसके आधार पर मेरिट लिस्ट (Merit List) बनाई जाती है। यह सूची पूरी तरह से उम्मीदवार द्वारा अर्जित कुल अंकों (Total Marks) के घटते क्रम में तैयार की जाती है।
आरक्षण नीति (Reservation Policy) का मेरिट लिस्ट तैयार करने में बहुत बड़ा योगदान होता है, जहाँ विभिन्न श्रेणियों जैसे सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी (General, OBC, SC, ST) के लिए अलग-अलग कट-ऑफ तय किए जाते हैं। रिक्त पदों (Vacancies) की संख्या और परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों की कुल तादाद के आधार पर मेरिट का निर्धारण होता है। महिलाओं और भूतपूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) के लिए क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) भी लागू किया जाता है।
यदि दो या दो से अधिक उम्मीदवारों के अंक बिल्कुल समान (Tie) हो जाते हैं, तो वरीयता देने के लिए जन्म तिथि (Date of Birth) का उपयोग किया जाता है। जिस उम्मीदवार की आयु अधिक होती है, उसे मेरिट में ऊपर रखा जाता है क्योंकि उसके पास सरकारी सेवा के कम अवसर बचे होते हैं। यदि आयु भी समान हो, तो शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification) या नाम के वर्णानुक्रम (Alphabetical Order) जैसे नियमों का सहारा लिया जाता है।
मेरिट लिस्ट में नाम आने का मतलब अंतिम चयन (Final Selection) नहीं होता, बल्कि यह केवल अगले चरण यानी दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलावा होता है। विभाग अक्सर कुल पदों से अधिक उम्मीदवारों (Waitlist Candidates) को सूची में शामिल करता है ताकि यदि कोई अभ्यर्थी दस्तावेज प्रस्तुत न कर सके या ज्वाइन न करे, तो पद खाली न रहे। यह प्रतीक्षा सूची (Waiting List) एक निश्चित समय तक वैध रहती है और भविष्य में काम आती है।
मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद जिलावार आवंटन (District Allocation) किया जाता है, जिसमें उम्मीदवारों की पसंद (Preference) और उनके रैंक का ध्यान रखा जाता है। उच्च रैंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को उनकी पसंद का गृह जिला (Home District) मिलने की संभावना अधिक रहती है। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करने के लिए सभी सूचियाँ आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) पर सार्वजनिक की जाती हैं।