बाबासाहेब अंबेडकर का सपना एक 'प्रबुद्ध भारत' (Enlightened India) बनाना था, जहाँ अज्ञानता और अंधकार का कोई स्थान न हो। उनके अनुसार, एक राष्ट्र तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके नागरिक मानसिक रूप से गुलाम (Mentally Enslaved) रहें। प्रबुद्धता का अर्थ है कि हर व्यक्ति विवेक (Reason) और करुणा के साथ निर्णय ले। उन्होंने बुद्ध की शिक्षाओं को इस लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग माना था। प्रबुद्ध भारत की नींव शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक समानता (Social Equality) पर टिकी है।
इसे प्राप्त करने का पहला सूत्र 'शिक्षा' (Education) है, जिसे बाबासाहेब ने सर्वोपरि माना। उनका मानना था कि केवल साक्षर होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो चरित्र निर्माण (Character Building) करे और मनुष्य को दूसरों के प्रति संवेदनशील बनाए। जब समाज का हर व्यक्ति शिक्षित होगा, तभी वह तर्क कर पाएगा और गलत परंपराओं का विरोध कर सकेगा। प्रबुद्ध भारत की यात्रा हर घर में ज्ञान का दीपक जलाने से शुरू होती है।
दूसरा प्रमुख सूत्र 'जाति का विनाश' (Annihilation of Caste) है। बाबासाहेब का तर्क था कि जातिवाद एक ऐसी बीमारी है जो समाज को भीतर से खोखला कर देती है। जब तक हम जातियों में बंटे रहेंगे, तब तक एक अखंड राष्ट्र (United Nation) का सपना पूरा नहीं हो सकता। प्रबुद्ध भारत के लिए अंतरजातीय विवाह (Inter-caste Marriage) और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देना अनिवार्य है। जातिविहीन समाज (Casteless Society) ही मानवता की सच्ची पहचान है।
आर्थिक न्याय (Economic Justice) भी प्रबुद्ध भारत की कल्पना का एक अनिवार्य हिस्सा है। बाबासाहेब चाहते थे कि देश की संपत्ति पर सबका अधिकार हो और कोई भी व्यक्ति गरीबी के कारण शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। वे राज्य समाजवाद (State Socialism) के पक्षधर थे जिससे संसाधनों का समान वितरण (Equal Distribution) सुनिश्चित हो सके। जब जनता आर्थिक रूप से समृद्ध होगी, तभी वह सांस्कृतिक और बौद्धिक विकास की ओर बढ़ पाएगी।
नैतिकता (Morality) और बंधुत्व प्रबुद्ध भारत का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है। कानून के डर से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना से समाज चलना चाहिए। बाबासाहेब ने सिखाया कि लोकतंत्र (Democracy) केवल एक सरकारी तंत्र नहीं है, बल्कि यह एक साथ रहने का एक तरीका है। प्रबुद्ध भारत तभी बनेगा जब हम 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' (Welfare and Happiness of Many) के मार्ग पर चलेंगे। उनके ये सूत्र आज भी भारत को विश्व गुरु (World Leader) बनाने के लिए सबसे सटीक रोडमैप प्रदान करते हैं।