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'प्रबुद्ध भारत' का संकल्प (Resolution of Enlightened India) बाबासाहेब का वह अधूरा सपना है जिसे पूरा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसका अर्थ है एक ऐसा भारत जो ज्ञान, करुणा और नैतिकता (Ethics) से परिपूर्ण हो। इसे साकार करने के लिए सबसे पहले हमें अपने भीतर से जातिवाद और ऊंच-नीच के भाव को पूरी तरह समाप्त करना होगा। जब हम एक-दूसरे को केवल 'भारतीय' (Indian) के रूप में देखना शुरू करेंगे, तभी प्रबुद्ध भारत की नींव मजबूत होगी।

शिक्षा का प्रसार (Spread of Education) इस संकल्प को पूरा करने की पहली सीढ़ी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश का कोई भी बच्चा गरीबी के कारण स्कूल जाने से वंचित न रहे। विशेष रूप से वंचित वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा (Technical Education) पहुँचाना अनिवार्य है। प्रबुद्धता तभी आएगी जब हमारा ज्ञान केवल डिग्रियाँ लेने तक सीमित न रहकर समाज की समस्याओं का समाधान (Problem Solving) ढूंढने में उपयोग होगा।

महिलाओं की समानता और सुरक्षा (Safety and Equality of Women) प्रबुद्ध भारत की अनिवार्य शर्त है। बाबासाहेब चाहते थे कि महिलाएं शिक्षित होकर समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व करें। हमें ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जहाँ नारी की गरिमा सुरक्षित हो और उसे अपनी प्रतिभा दिखाने के पूर्ण अवसर (Full Opportunities) प्राप्त हों। एक ऐसा समाज जहाँ स्त्री और पुरुष कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें, वही वास्तविक प्रबुद्ध समाज (Enlightened Society) कहलाएगा।

आर्थिक न्याय और संसाधनों का वितरण (Distribution of Resources) भी इस संकल्प का हिस्सा है। हमें ऐसी आर्थिक नीतियां बनानी होंगी जो अमीरी और गरीबी की खाई को कम करें और सबको न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं (Basic Amenities) प्रदान करें। स्वरोजगार और उद्यमिता (Entrepreneurship) को बढ़ावा देकर हम युवाओं को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। जब देश का हर नागरिक आर्थिक रूप से स्वतंत्र होगा, तभी वह मानसिक और वैचारिक रूप से भी प्रबुद्ध बन पाएगा।

अंत में, बुद्ध के बताए हुए 'करुणा और मैत्री' (Compassion and Friendship) के मार्ग पर चलकर ही हम प्रबुद्ध भारत के सपने को हकीकत में बदल सकते हैं। हमें नफरत की जगह प्रेम और प्रतिशोध की जगह क्षमा को महत्व देना होगा। वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper) और संवैधानिक मूल्यों का पालन ही हमें एक विकसित और सभ्य राष्ट्र बनाएगा। बाबासाहेब का 'प्रबुद्ध भारत' का संकल्प हमें निरंतर मेहनत करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक खुशहाली पहुँचाने के लिए प्रेरित करता रहता है।

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'प्रबुद्ध भारत' का संकल्प (Resolution of Enlightened India) बाबासाहेब का वह अधूरा सपना है जिसे पूरा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसका अर्थ है एक ऐसा भारत जो ज्ञान, करुणा और नैतिकता (Ethics) से परिपूर्ण हो। इसे साकार करने के लिए सबसे पहले हमें अपने भीतर से जातिवाद और ऊंच-नीच के भाव को पूरी तरह समाप्त करना होगा। जब हम एक-दूसरे को केवल 'भारतीय' (Indian) के रूप में देखना शुरू करेंगे, तभी प्रबुद्ध भारत की नींव मजबूत होगी।

शिक्षा का प्रसार (Spread of Education) इस संकल्प को पूरा करने की पहली सीढ़ी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि देश का कोई भी बच्चा गरीबी के कारण स्कूल जाने से वंचित न रहे। विशेष रूप से वंचित वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा (Technical Education) पहुँचाना अनिवार्य है। प्रबुद्धता तभी आएगी जब हमारा ज्ञान केवल डिग्रियाँ लेने तक सीमित न रहकर समाज की समस्याओं का समाधान (Problem Solving) ढूंढने में उपयोग होगा।

महिलाओं की समानता और सुरक्षा (Safety and Equality of Women) प्रबुद्ध भारत की अनिवार्य शर्त है। बाबासाहेब चाहते थे कि महिलाएं शिक्षित होकर समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व करें। हमें ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जहाँ नारी की गरिमा सुरक्षित हो और उसे अपनी प्रतिभा दिखाने के पूर्ण अवसर (Full Opportunities) प्राप्त हों। एक ऐसा समाज जहाँ स्त्री और पुरुष कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें, वही वास्तविक प्रबुद्ध समाज (Enlightened Society) कहलाएगा।

आर्थिक न्याय और संसाधनों का वितरण (Distribution of Resources) भी इस संकल्प का हिस्सा है। हमें ऐसी आर्थिक नीतियां बनानी होंगी जो अमीरी और गरीबी की खाई को कम करें और सबको न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं (Basic Amenities) प्रदान करें। स्वरोजगार और उद्यमिता (Entrepreneurship) को बढ़ावा देकर हम युवाओं को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। जब देश का हर नागरिक आर्थिक रूप से स्वतंत्र होगा, तभी वह मानसिक और वैचारिक रूप से भी प्रबुद्ध बन पाएगा।

अंत में, बुद्ध के बताए हुए 'करुणा और मैत्री' (Compassion and Friendship) के मार्ग पर चलकर ही हम प्रबुद्ध भारत के सपने को हकीकत में बदल सकते हैं। हमें नफरत की जगह प्रेम और प्रतिशोध की जगह क्षमा को महत्व देना होगा। वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper) और संवैधानिक मूल्यों का पालन ही हमें एक विकसित और सभ्य राष्ट्र बनाएगा। बाबासाहेब का 'प्रबुद्ध भारत' का संकल्प हमें निरंतर मेहनत करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक खुशहाली पहुँचाने के लिए प्रेरित करता रहता है।
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