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रोंगाली बिहू का सीधा संबंध प्रकृति के पुनर्जन्म (Rebirth of Nature) और वसंत के आगमन से है। जब आसमान में काले बादल घिरते हैं और पहली बारिश की बूंदें मिट्टी पर गिरती हैं, तब किसान अपनी नई फसल की तैयारी शुरू करते हैं। इस समय 'कपौ फूल' (Orchid) खिलने लगते हैं, जिन्हें बिहू नर्तकियाँ अपने बालों में सजाती हैं। प्रकृति का यह श्रृंगार बिहू के उत्सव को और भी अधिक सौंदर्यपूर्ण (Beautiful) बना देता है।

कृषि (Agriculture) की दृष्टि से बोहाग बिहू का पहला दिन 'गुरू बिहू' पशुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। गायों और बैलों को नहलाकर उन्हें नई रस्सी बांधी जाती है और उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है। चूंकि बैल खेती का मुख्य आधार रहे हैं, इसलिए उनकी पूजा करना फसल की सफलता (Success of Crops) सुनिश्चित करने का एक तरीका है। किसान इस समय अपनी भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए प्रार्थना करते हैं और बीज बोने का कार्य प्रारंभ करते हैं।

प्रकृति के साथ यह जुड़ाव बिहू गीतों (Bihu Geet) में भी स्पष्ट रूप से झलकता है। गीतों में कोयल की कूक, धान के खेत और ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) का वर्णन मिलता है। यह त्यौहार हमें याद दिलाता है कि मनुष्य का अस्तित्व प्रकृति की दया पर निर्भर है। बिहू के दौरान लोग '101 साक' (101 Herbs) खाते हैं, जो औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और बदलते मौसम में स्वास्थ्य (Health) की रक्षा करते हैं। यह परंपरा हमें आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों के महत्व से जोड़ती है।

बिहू का समय वर्षा ऋतु (Monsoon) के स्वागत का भी है, जो धान की खेती के लिए अनिवार्य है। ढोल की आवाज़ को बादलों की गड़गड़ाहट का प्रतीक माना जाता है, जो बारिश को बुलाने का एक आह्वान है। इस प्रकार, बिहू केवल एक नाच-गाने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक कृषि प्रधान संस्कृति (Agrarian Culture) का जीवन दर्शन है। प्रकृति की हर छोटी-बड़ी हलचल इस त्यौहार के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।

आज भी असम का ग्रामीण समाज इन परंपराओं को पूरी निष्ठा (Devotion) के साथ निभाता है। हालांकि आधुनिक तकनीक ने खेती के तरीके बदल दिए हैं, लेकिन बिहू के समय मिट्टी और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना आज भी वैसी ही है। यह त्यौहार हमें पर्यावरण संरक्षण (Environment Conservation) और संसाधनों के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है। रोंगाली बिहू वास्तव में मनुष्य और प्रकृति के शाश्वत प्रेम का एक उत्सव है।

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रोंगाली बिहू का सीधा संबंध प्रकृति के पुनर्जन्म (Rebirth of Nature) और वसंत के आगमन से है। जब आसमान में काले बादल घिरते हैं और पहली बारिश की बूंदें मिट्टी पर गिरती हैं, तब किसान अपनी नई फसल की तैयारी शुरू करते हैं। इस समय 'कपौ फूल' (Orchid) खिलने लगते हैं, जिन्हें बिहू नर्तकियाँ अपने बालों में सजाती हैं। प्रकृति का यह श्रृंगार बिहू के उत्सव को और भी अधिक सौंदर्यपूर्ण (Beautiful) बना देता है।

कृषि (Agriculture) की दृष्टि से बोहाग बिहू का पहला दिन 'गुरू बिहू' पशुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। गायों और बैलों को नहलाकर उन्हें नई रस्सी बांधी जाती है और उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है। चूंकि बैल खेती का मुख्य आधार रहे हैं, इसलिए उनकी पूजा करना फसल की सफलता (Success of Crops) सुनिश्चित करने का एक तरीका है। किसान इस समय अपनी भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए प्रार्थना करते हैं और बीज बोने का कार्य प्रारंभ करते हैं।

प्रकृति के साथ यह जुड़ाव बिहू गीतों (Bihu Geet) में भी स्पष्ट रूप से झलकता है। गीतों में कोयल की कूक, धान के खेत और ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) का वर्णन मिलता है। यह त्यौहार हमें याद दिलाता है कि मनुष्य का अस्तित्व प्रकृति की दया पर निर्भर है। बिहू के दौरान लोग '101 साक' (101 Herbs) खाते हैं, जो औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और बदलते मौसम में स्वास्थ्य (Health) की रक्षा करते हैं। यह परंपरा हमें आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों के महत्व से जोड़ती है।

बिहू का समय वर्षा ऋतु (Monsoon) के स्वागत का भी है, जो धान की खेती के लिए अनिवार्य है। ढोल की आवाज़ को बादलों की गड़गड़ाहट का प्रतीक माना जाता है, जो बारिश को बुलाने का एक आह्वान है। इस प्रकार, बिहू केवल एक नाच-गाने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक कृषि प्रधान संस्कृति (Agrarian Culture) का जीवन दर्शन है। प्रकृति की हर छोटी-बड़ी हलचल इस त्यौहार के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।

आज भी असम का ग्रामीण समाज इन परंपराओं को पूरी निष्ठा (Devotion) के साथ निभाता है। हालांकि आधुनिक तकनीक ने खेती के तरीके बदल दिए हैं, लेकिन बिहू के समय मिट्टी और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना आज भी वैसी ही है। यह त्यौहार हमें पर्यावरण संरक्षण (Environment Conservation) और संसाधनों के प्रति जागरूक रहने का संदेश देता है। रोंगाली बिहू वास्तव में मनुष्य और प्रकृति के शाश्वत प्रेम का एक उत्सव है।
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