सरकारी ड्राइवर के चयन के लिए आजकल अधिकांश विभाग सबसे पहले लिखित परीक्षा (Written Exam) आयोजित करते हैं। इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान (General Knowledge), सरल गणित और विशेष रूप से वाहन के पुर्जों (Vehicle Parts) व यातायात नियमों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। यह परीक्षा बहुविकल्पीय (Objective Type) होती है और उम्मीदवारों की मानसिक सतर्कता की जाँच करती है।
लिखित परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को प्रायोगिक परीक्षा यानी ड्राइविंग स्किल टेस्ट (Driving Skill Test) के लिए बुलाया जाता है। यह इस भर्ती का सबसे कठिन और निर्णायक चरण होता है। इसमें एक विशेषज्ञ समिति के सामने उम्मीदवार को वाहन चलाकर दिखाना होता है। यहाँ आपकी रिवर्स पार्किंग (Reverse Parking), ढलान पर वाहन नियंत्रण और क्लच-ब्रेक के सही तालमेल (Coordination) को परखा जाता है।
स्किल टेस्ट के दौरान ही मौखिक परीक्षा (Viva-Voce) भी ली जा सकती है, जिसमें मोटर मैकेनिज्म (Motor Mechanism) से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। आपसे इंजन (Engine), बैटरी, कूलेंट और टायर प्रेशर जैसे तकनीकी विषयों (Technical Topics) पर प्रश्न किए जा सकते हैं। एक अच्छे ड्राइवर को वाहन की छोटी-मोटी खराबियों को खुद ठीक करने की समझ होनी चाहिए।
चयन का एक अन्य महत्वपूर्ण पड़ाव शारीरिक मानक परीक्षण (Physical Standard Test) है। इसमें कद (Height) और शारीरिक क्षमता की जाँच होती है। कुछ विभागों में केवल उन्हीं उम्मीदवारों को अंतिम सूची में जगह मिलती है जो ड्राइविंग टेस्ट और तकनीकी साक्षात्कार (Technical Interview) दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और योग्यता (Merit) पर आधारित होती है।
अंतिम योग्यता सूची (Final Merit List) लिखित परीक्षा और ड्राइविंग टेस्ट के अंकों को मिलाकर तैयार की जाती है। कभी-कभी ड्राइविंग टेस्ट केवल अर्हकारी (Qualifying) होता है और चयन लिखित परीक्षा के आधार पर ही होता है। सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) जारी करने से पहले उनके मूल दस्तावेजों (Original Documents) की अंतिम जाँच की जाती है।