श्रमिकों के संदर्भ में सामाजिक न्याय (Social Justice) का अर्थ है उन्हें समाज में समान अवसर और सुरक्षा प्रदान करना। इसका तात्पर्य यह है कि जन्म या आर्थिक स्थिति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न हो और प्रत्येक मेहनतकश को उसकी मेहनत का फल सम्मान के साथ मिले। इसमें कार्यस्थल पर गरिमा (Dignity at Workplace), स्वास्थ्य सुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितताओं से बचाव शामिल है। सरकार विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (Social Security Schemes) के माध्यम से इस न्याय को धरातल पर उतारने का प्रयास करती है।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (Employees' State Insurance Corporation - ESIC) सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने वाली भारत की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक है। यह योजना उन कर्मचारियों के लिए है जिनका वेतन एक निश्चित सीमा से कम है, और यह उन्हें व्यापक चिकित्सा लाभ (Medical Benefits) प्रदान करती है। बीमारी के दौरान मिलने वाली छुट्टी (Sickness Benefit) में वेतन का भुगतान होना कामगारों के लिए एक बड़ी राहत है। यह योजना परिवार के आश्रितों को भी मुफ्त इलाज की सुविधा देती है।
दुर्घटना की स्थिति में ईएसआईसी (ESIC) के माध्यम से मिलने वाला विकलांगता लाभ (Disablement Benefit) श्रमिक के जीवन को टूटने से बचाता है। यदि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को मासिक पेंशन (Pension) और अंत्येष्टि खर्च (Funeral Expenses) दिया जाता है। यह वित्तीय सुरक्षा (Financial Security) ही सामाजिक न्याय का असली स्वरूप है जहाँ संकट के समय सरकार कर्मचारी के साथ खड़ी होती है।
मातृत्व लाभ (Maternity Benefit) के तहत महिला कर्मचारियों को प्रसव के दौरान सवेतन अवकाश और चिकित्सा सहायता दी जाती है। इससे महिलाओं को कार्यबल (Workforce) में बने रहने और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने में मदद मिलती है। सामाजिक न्याय का यह पहलू लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा देता है। ईएसआईसी के अस्पताल और औषधालय (Dispensaries) औद्योगिक क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के मुख्य स्तंभ हैं।
कुल मिलाकर, सामाजिक न्याय का उद्देश्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जहाँ श्रमिक केवल एक 'संसाधन' न बनकर एक 'नागरिक' के रूप में अपनी पहचान बनाए रखें। उनके लिए उचित आवास, शुद्ध पेयजल और बच्चों के लिए छात्रवृत्ति (Scholarship) जैसे लाभ भी इसी न्याय का हिस्सा हैं। जब एक कर्मचारी सुरक्षित महसूस करता है, तो उसकी उत्पादकता (Productivity) बढ़ती है और औद्योगिक शांति (Industrial Peace) बनी रहती है। श्रम की गरिमा को पहचानना ही एक सभ्य समाज की पहचान है।