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पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा (Rath Yatra) में सबसे मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) का विशाल रथ 'नंदीघोष' (Nandighosa Rath) होता है। इस रथ की कुल ऊंचाई लगभग 45 फीट होती है और इसे सजाने के लिए पीले और लाल रंग के कपड़ों (Yellow and Red Cloths) का इस्तेमाल किया जाता है। हिंदू धर्म में पीला रंग भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का प्रिय माना जाता है। इस रथ की सबसे बड़ी पहचान इसमें लगे 16 विशाल पहिये (16 Massive Wheels) हैं, जो सौर मंडल (Solar System) या कलाओं के प्रतीक माने जाते हैं।

नंदीघोष रथ (Nandighosa Rath) के रक्षक के रूप में भगवान नृसिंह (Lord Narasimha) को माना जाता है और इस रथ के सारथी (Charioteer) का नाम दारुक (Daruka) है। रथ के ऊपर फहराने वाले ध्वज को त्रैलोक्यमोहिनी (Trailokyamohini) कहा जाता है, जो यह संदेश देता है कि भगवान पूरे ब्रह्मांड के स्वामी (Lord of Universe) हैं। इस रथ को खींचने वाली रस्सियों (Ropes) को शंखचूड़ (Sankhachuda) नाम से पुकारा जाता है। भक्त इन रस्सियों को छूना अपना परम सौभाग्य (Great Fortune) समझते हैं।

रथ के निर्माण में उपयोग की जाने वाली लकड़ी (Wood) का चयन बहुत ही कड़े नियमों के साथ किया जाता है। नंदीघोष रथ (Nandighosa) पर चार घोड़े (Four Horses) सवार होते हैं जिनके नाम शंख, बलाहक, श्वेत और हरिद्राश्व (Shankha, Balahaka, Sweta and Haridraswa) हैं। ये घोड़े ऊर्जा और गतिशीलता (Energy and Mobility) का प्रतिनिधित्व करते हैं। रथ के चारों ओर विभिन्न देवताओं (Deities) की छोटी प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं जो सुरक्षा और शुचिता (Sanctity) का प्रतीक हैं।

इस रथ की संरचना (Structure) को इस तरह बनाया जाता है कि यह एक चलते-फिरते मंदिर (Moving Temple) जैसा दिखाई दे। जब भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) इस पर सवार होते हैं, तो इसे ब्रह्मांड का रथ माना जाता है। रथ के पहियों की गड़गड़ाहट को बादलों के गर्जन के समान शुभ माना जाता है। नंदीघोष रथ (Nandighosa Rath) को खींचने के लिए उमड़ने वाला जनसैलाब (Sea of Devotees) यह दर्शाता है कि ईश्वर और भक्त के बीच कोई दूरी नहीं है।

धार्मिक मान्यताओं (Religious Beliefs) के अनुसार, जो व्यक्ति एक बार नंदीघोष रथ के दर्शन कर लेता है, उसके जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं। रथ की छत पर लगे गुंबद (Dome) को कमल के फूल (Lotus Flower) की तरह आकार दिया जाता है। यह रथ केवल लकड़ी का ढांचा नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की अटूट आस्था (Unwavering Faith) का केंद्र है। यात्रा के समापन पर इस रथ की लकड़ियों का उपयोग मंदिर की पवित्र रसोई (Holy Kitchen) में प्रसाद पकाने के लिए किया जाता है।

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पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा (Rath Yatra) में सबसे मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) का विशाल रथ 'नंदीघोष' (Nandighosa Rath) होता है। इस रथ की कुल ऊंचाई लगभग 45 फीट होती है और इसे सजाने के लिए पीले और लाल रंग के कपड़ों (Yellow and Red Cloths) का इस्तेमाल किया जाता है। हिंदू धर्म में पीला रंग भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का प्रिय माना जाता है। इस रथ की सबसे बड़ी पहचान इसमें लगे 16 विशाल पहिये (16 Massive Wheels) हैं, जो सौर मंडल (Solar System) या कलाओं के प्रतीक माने जाते हैं।

नंदीघोष रथ (Nandighosa Rath) के रक्षक के रूप में भगवान नृसिंह (Lord Narasimha) को माना जाता है और इस रथ के सारथी (Charioteer) का नाम दारुक (Daruka) है। रथ के ऊपर फहराने वाले ध्वज को त्रैलोक्यमोहिनी (Trailokyamohini) कहा जाता है, जो यह संदेश देता है कि भगवान पूरे ब्रह्मांड के स्वामी (Lord of Universe) हैं। इस रथ को खींचने वाली रस्सियों (Ropes) को शंखचूड़ (Sankhachuda) नाम से पुकारा जाता है। भक्त इन रस्सियों को छूना अपना परम सौभाग्य (Great Fortune) समझते हैं।

रथ के निर्माण में उपयोग की जाने वाली लकड़ी (Wood) का चयन बहुत ही कड़े नियमों के साथ किया जाता है। नंदीघोष रथ (Nandighosa) पर चार घोड़े (Four Horses) सवार होते हैं जिनके नाम शंख, बलाहक, श्वेत और हरिद्राश्व (Shankha, Balahaka, Sweta and Haridraswa) हैं। ये घोड़े ऊर्जा और गतिशीलता (Energy and Mobility) का प्रतिनिधित्व करते हैं। रथ के चारों ओर विभिन्न देवताओं (Deities) की छोटी प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं जो सुरक्षा और शुचिता (Sanctity) का प्रतीक हैं।

इस रथ की संरचना (Structure) को इस तरह बनाया जाता है कि यह एक चलते-फिरते मंदिर (Moving Temple) जैसा दिखाई दे। जब भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) इस पर सवार होते हैं, तो इसे ब्रह्मांड का रथ माना जाता है। रथ के पहियों की गड़गड़ाहट को बादलों के गर्जन के समान शुभ माना जाता है। नंदीघोष रथ (Nandighosa Rath) को खींचने के लिए उमड़ने वाला जनसैलाब (Sea of Devotees) यह दर्शाता है कि ईश्वर और भक्त के बीच कोई दूरी नहीं है।

धार्मिक मान्यताओं (Religious Beliefs) के अनुसार, जो व्यक्ति एक बार नंदीघोष रथ के दर्शन कर लेता है, उसके जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं। रथ की छत पर लगे गुंबद (Dome) को कमल के फूल (Lotus Flower) की तरह आकार दिया जाता है। यह रथ केवल लकड़ी का ढांचा नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की अटूट आस्था (Unwavering Faith) का केंद्र है। यात्रा के समापन पर इस रथ की लकड़ियों का उपयोग मंदिर की पवित्र रसोई (Holy Kitchen) में प्रसाद पकाने के लिए किया जाता है।
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