पन्ना रत्न का स्वामी बुध ग्रह है और यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए वरदान है जो बैंकिंग (Banking), शिक्षण (Teaching) या लेखन (Writing) के क्षेत्र में हैं। इसे धारण करने से रचनात्मकता (Creativity) का विकास होता है और व्यक्ति के विचारों में स्पष्टता आती है। जो जातक प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए पन्ना धारण करना मानसिक क्षमता (Mental Capacity) को बढ़ाने वाला सिद्ध होता है।
इस रत्न को पहनने से एकाग्रता बढ़ती है और मन शांत रहता है। जो लोग बहुत अधिक तनाव (Stress) लेते हैं, उनके लिए पन्ना शीतलता प्रदान करने वाला होता है। यह आँखों की रोशनी (Eyesight) को बेहतर बनाने और त्वचा में चमक लाने में भी सहायक माना जाता है। व्यापारिक दृष्टिकोण से पन्ना पहनने वाले व्यक्ति को सौदों में बेहतर मोलभाव (Negotiation) करने की शक्ति प्राप्त होती है।
पन्ना पहनने के लिए बुधवार (Wednesday) की सुबह सूर्योदय के समय को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। रत्न का वजन कम से कम 3 से 6 रत्ती का होना चाहिए और इसे कनिष्ठा उंगली (Little Finger) में धारण करना चाहिए। अंगूठी को सबसे पहले गंगाजल (Holy Water) और कच्चे दूध के मिश्रण में कुछ देर के लिए रखना चाहिए ताकि उसकी अशुद्धियां दूर हो जाएं।
अंगूठी को शुद्ध करने के बाद 'ॐ बुं बुधाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना अनिवार्य है। इसके बाद रत्न को भगवान विष्णु या गणेश जी के चरणों में स्पर्श कराकर धारण करना चाहिए। पन्ना रत्न का स्पर्श त्वचा (Skin Contact) से होना बहुत जरूरी है ताकि इसकी किरणें शरीर में प्रवेश कर सकें। यह रत्न जातक के व्यक्तित्व (Personality) को प्रभावशाली बनाता है और उसे भीड़ में अलग पहचान देता है।
यह ध्यान रखना चाहिए कि पन्ना के साथ मूंगा या मोती जैसे रत्न बिना विशेषज्ञ की सलाह के न पहनें। यदि पन्ना टूट जाए या उसमें कोई खरोंच आ जाए, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। असली पन्ना (Natural Emerald) पारदर्शी और मखमली चमक वाला होता है। इसे धारण करने के कुछ सप्ताह बाद ही करियर (Career) में सकारात्मक बदलाव और धन लाभ के अवसर दिखाई देने लगते हैं।