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पुखराज, जिसे अंग्रेजी में येलो सफायर (Yellow Sapphire) कहा जाता है, नवरत्नों में सबसे शक्तिशाली और सात्विक रत्न है। इसे पहनने से व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) में सुधार आता है और न्यायप्रियता बढ़ती है। जो लोग प्रशासन (Administration), वकालत या शिक्षा के क्षेत्र में हैं, उनके लिए पुखराज धारण करना पदोन्नति (Promotion) के द्वार खोलता है।

स्वास्थ्य के लिहाज से पुखराज पाचन तंत्र (Digestive System) और लीवर (Liver) से संबंधित बीमारियों में राहत प्रदान करता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है और मोटापे (Obesity) को नियंत्रित करने में सहायक होता है। पुखराज पहनने वाले जातक के चेहरे पर एक विशेष प्रकार का तेज (Glow) और आत्मविश्वास झलकता है। यह रत्न नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर चित्त को प्रसन्न रखता है।

पुखराज धारण करने के लिए गुरुवार (Thursday) की सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ होता है। रत्न कम से कम 3.25 रत्ती का होना चाहिए और वह पूरी तरह पारदर्शी (Transparent) होना चाहिए। इसे सोने (Gold) या पीतल की अंगूठी में इस प्रकार जड़वाएं कि रत्न का निचला हिस्सा आपकी त्वचा (Skin) को स्पर्श करे। धारण करने से पहले इसे गंगाजल और कच्चे दूध (Raw Milk) से शुद्ध करना अत्यंत आवश्यक है।

अंगूठी को शुद्ध करने के पश्चात विष्णु लक्ष्मी (Vishnu Lakshmi) की मूर्ति के सामने रखें और 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों सः गुरुवे नमः' मंत्र का जाप करें। इसके बाद इसे अपने दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली (Index Finger) में पहनें। पुखराज को कभी भी हीरा या नीलम के साथ बिना ज्योतिषी परामर्श के नहीं पहनना चाहिए। रत्न की गुणवत्ता (Quality) जितनी अच्छी होगी, उसके परिणाम उतने ही शीघ्र और स्थायी प्राप्त होंगे।

असली पुखराज की पहचान (Identification) उसके रंग और चमक से की जा सकती है। इसे पहनने के बाद जातक के व्यवहार में गंभीरता और दयालुता का भाव आता है। यदि रत्न धारण करने के बाद बुरे सपने आएं या स्वास्थ्य बिगड़े, तो उसे तुरंत उतार देना चाहिए। सही विधि और श्रद्धा से पहना गया पुखराज जीवन में आर्थिक समृद्धि (Economic Prosperity) और आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth) का मार्ग प्रशस्त करता है।

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पुखराज, जिसे अंग्रेजी में येलो सफायर (Yellow Sapphire) कहा जाता है, नवरत्नों में सबसे शक्तिशाली और सात्विक रत्न है। इसे पहनने से व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) में सुधार आता है और न्यायप्रियता बढ़ती है। जो लोग प्रशासन (Administration), वकालत या शिक्षा के क्षेत्र में हैं, उनके लिए पुखराज धारण करना पदोन्नति (Promotion) के द्वार खोलता है।

स्वास्थ्य के लिहाज से पुखराज पाचन तंत्र (Digestive System) और लीवर (Liver) से संबंधित बीमारियों में राहत प्रदान करता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है और मोटापे (Obesity) को नियंत्रित करने में सहायक होता है। पुखराज पहनने वाले जातक के चेहरे पर एक विशेष प्रकार का तेज (Glow) और आत्मविश्वास झलकता है। यह रत्न नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर चित्त को प्रसन्न रखता है।

पुखराज धारण करने के लिए गुरुवार (Thursday) की सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ होता है। रत्न कम से कम 3.25 रत्ती का होना चाहिए और वह पूरी तरह पारदर्शी (Transparent) होना चाहिए। इसे सोने (Gold) या पीतल की अंगूठी में इस प्रकार जड़वाएं कि रत्न का निचला हिस्सा आपकी त्वचा (Skin) को स्पर्श करे। धारण करने से पहले इसे गंगाजल और कच्चे दूध (Raw Milk) से शुद्ध करना अत्यंत आवश्यक है।

अंगूठी को शुद्ध करने के पश्चात विष्णु लक्ष्मी (Vishnu Lakshmi) की मूर्ति के सामने रखें और 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों सः गुरुवे नमः' मंत्र का जाप करें। इसके बाद इसे अपने दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली (Index Finger) में पहनें। पुखराज को कभी भी हीरा या नीलम के साथ बिना ज्योतिषी परामर्श के नहीं पहनना चाहिए। रत्न की गुणवत्ता (Quality) जितनी अच्छी होगी, उसके परिणाम उतने ही शीघ्र और स्थायी प्राप्त होंगे।

असली पुखराज की पहचान (Identification) उसके रंग और चमक से की जा सकती है। इसे पहनने के बाद जातक के व्यवहार में गंभीरता और दयालुता का भाव आता है। यदि रत्न धारण करने के बाद बुरे सपने आएं या स्वास्थ्य बिगड़े, तो उसे तुरंत उतार देना चाहिए। सही विधि और श्रद्धा से पहना गया पुखराज जीवन में आर्थिक समृद्धि (Economic Prosperity) और आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth) का मार्ग प्रशस्त करता है।
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