लहसुनिया रत्न (Cats Eye) केतु ग्रह का मुख्य रत्न है जिसे वैदूर्य मणि भी कहा जाता है। इसे पहनने से व्यक्ति के भीतर छिपा हुआ भय समाप्त होता है और आत्मविश्वास (Self-Confidence) में वृद्धि होती है। यह रत्न विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो शेयर बाजार (Share Market) या जोखिम भरे निवेश (Risky Investments) से जुड़े हैं। यह अचानक होने वाले नुकसान से बचाता है और भाग्य को बल देता है।
चिकित्सा ज्योतिष (Medical Astrology) के अनुसार लहसुनिया पहनने से पेट की बीमारियाँ और मानसिक विकार (Mental Disorders) दूर होते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है और पुरानी बीमारियों से उबरने में मदद करता है। जिन जातकों को बुरी नजर (Evil Eye) जल्दी लगती है, उनके लिए लहसुनिया एक सुरक्षा कवच (Protective Shield) की तरह काम करता है। यह रत्न शत्रुओं पर विजय दिलाने में भी सक्षम है।
लहसुनिया धारण करने के लिए शनिवार (Saturday) की शाम या मंगलवार का दिन श्रेष्ठ माना गया है। रत्न का वजन कम से कम 3 से 5 रत्ती होना चाहिए और इसे पंचधातु (Five Metals) या चांदी की अंगूठी में जड़वाना चाहिए। पहनने से पहले अंगूठी को कच्चे दूध और गंगाजल (Holy Water) के मिश्रण से शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद केतु के बीज मंत्र का जाप करते हुए इसे अपनी मध्यमा या अनामिका उंगली में पहनना चाहिए।
रत्न की शुद्धता (Purity) की पहचान करना बहुत आवश्यक है। असली लहसुनिया के बीच में एक चमकदार रेखा होती है जो हिलाने पर बिल्ली की आंख (Cats Eye) की तरह घूमती हुई प्रतीत होती है। इसे अंधेरे में रखने पर इसमें से प्रकाश की किरणें निकलती हुई दिखाई देती हैं। यदि रत्न में कोई खरोंच या दाग हो, तो उसे नहीं पहनना चाहिए क्योंकि दोषपूर्ण रत्न नकारात्मक प्रभाव (Negative Impact) दे सकता है।
लहसुनिया के साथ माणिक्य, मूंगा या पुखराज (Yellow Sapphire) जैसे रत्न बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं पहनने चाहिए। केतु एक रहस्यमयी ग्रह है, इसलिए इसका रत्न धारण करने के बाद यदि जीवन में अचानक अशांति बढ़े, तो इसे तुरंत उतार देना चाहिए। सही विधि और श्रद्धा से धारण किया गया लहसुनिया जातक को अध्यात्म और भौतिक उन्नति (Materialistic Progress) के शिखर पर पहुँचा सकता है।