शनि देव को कर्मफल दाता (Giver of Fruits of Actions) कहा जाता है, जो व्यक्ति को उसके पिछले कर्मों के आधार पर फल देते हैं। शनि की महादशा या साढ़ेसाती (Sadesati) के दौरान करियर में मंदी और प्रयासों में असफलता मिलना एक सामान्य लक्षण है। यह समय व्यक्ति की परीक्षा (Testing Time) का होता है, जहाँ उसे धैर्य और ईमानदारी का परिचय देना पड़ता है। शनि देव अनुशासनहीनता (Indiscipline) और आलस्य करने वालों को दंडित करते हैं।
नौकरी या व्यवसाय (Business) में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए शनिवार की शाम पीपल के पेड़ (Peepal Tree) के नीचे सरसों के तेल (Mustard Oil) का दीपक जलाना चाहिए। शनि चालीसा (Shani Chalisa) का पाठ करना और काले तिल (Black Sesame) का दान करना करियर में स्थिरता (Stability) लाता है। जो लोग अपने अधीनस्थों (Subordinates) और श्रमिकों का सम्मान करते हैं, उन पर शनि की कृपा सदैव बनी रहती है।
हनुमान जी (Lord Hanuman) की पूजा करना शनि के प्रकोप से बचने का सबसे अचूक मार्ग है। मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड (Sundarkand) का पाठ करने से शनि की दशा के कठोर प्रभावों में नरमी आती है। शनि देव हनुमान भक्तों को कभी कष्ट नहीं देते, इसलिए संकटमोचन की शरण में जाने से रुके हुए कार्य पुनः गति पकड़ने लगते हैं। यह भक्ति जातक के भीतर अटूट आत्मविश्वास (Self-confidence) पैदा करती है।
नीलम रत्न (Blue Sapphire) शनि का मुख्य रत्न है, जो करियर में अचानक ऊंचाइयां प्रदान कर सकता है। हालांकि, यह रत्न अत्यंत प्रभावशाली (Powerful) होता है, इसलिए इसे बिना ज्योतिषी परामर्श के कभी नहीं पहनना चाहिए। यदि नीलम अनुकूल न हो, तो यह विपरीत परिणाम भी दे सकता है। विकल्प के रूप में नीली (Iolite) या लोहे का छल्ला (Iron Ring) बीच की उंगली में धारण करना भी एक सुरक्षित उपाय माना जाता है।
गरीबों को काले कंबल (Blankets) और जूते-चप्पल (Footwear) का दान करना शनि की अनुकूलता पाने का श्रेष्ठ तरीका है। मांस-मदिरा का पूरी तरह त्याग करना और सात्विक जीवनशैली (Sattvic Lifestyle) अपनाना शनि दशा के दौरान अनिवार्य है। जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा से करता है, तो शनि देव उसे समाज में उच्च पद (High Position) और प्रतिष्ठा प्रदान करते हैं। शनि की दशा वास्तव में व्यक्ति को परिपक्व (Mature) बनाने के लिए आती है।