बृहस्पति या गुरु (Jupiter) को सभी ग्रहों में सबसे शुभ माना जाता है, जिसकी सोलह वर्ष की महादशा जीवन में सुख-समृद्धि और ज्ञान लेकर आती है। यदि कुंडली में गुरु अनुकूल है, तो इस अवधि में विवाह (Marriage), संतान सुख और करियर में बड़ी पदोन्नति (Promotion) के योग बनते हैं। हालांकि, यदि गुरु कमजोर है, तो व्यक्ति को मान-हानि और मोटापे (Obesity) जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
धन और संपत्ति (Property) की वृद्धि के लिए गुरुवार (Thursday) के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करनी चाहिए। केले के वृक्ष (Banana Tree) की जड़ में जल देना और वहां शुद्ध घी का दीपक जलाना गुरु को प्रसन्न करने का एक शास्त्रीय उपाय है। इस दिन पीले रंग के भोजन (Yellow Food) जैसे चने की दाल और बेसन के लड्डू का दान करना आर्थिक तंगी को दूर करता है। पीला रंग गुरु की ऊर्जा का प्रतीक है।
विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए कन्याओं को गुरुवार का व्रत (Fasting) रखना चाहिए और जल में हल्दी (Turmeric) डालकर स्नान करना चाहिए। गुरुवार के दिन किसी ब्राह्मण या गुरु (Mentor) को धार्मिक पुस्तकें (Religious Books) और पीले वस्त्र दान करना शीघ्र विवाह के मार्ग प्रशस्त करता है। गुरु का आशीर्वाद मिलने से वैवाहिक जीवन (Married Life) सुखद और सामंजस्यपूर्ण बना रहता है।
पुखराज रत्न (Yellow Sapphire) गुरु ग्रह का मुख्य रत्न है, जो बुद्धि को प्रखर बनाता है और धन को आकर्षित करता है। इसे सोने (Gold) की अंगूठी में पहनना सबसे उत्तम होता है, क्योंकि सोना भी गुरु की धातु है। रत्न धारण करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व (Personality) में निखार आता है और समाज में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है। यह रत्न विशेष रूप से शिक्षा (Education) और न्याय क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए वरदान साबित होता है।
अपने गुरुओं और बड़ों का सम्मान करना बृहस्पति को प्रसन्न करने का सबसे सरल और प्राकृतिक नियम है। प्रतिदिन 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करना आंतरिक शक्ति (Inner Strength) को बढ़ाता है। गुरु की दशा में सात्विक आहार लेना और झूठ बोलने से बचना चाहिए। जब गुरु देव की कृपा होती है, तो व्यक्ति को बिना मांगे ही संसार के सभी सुख और ऐश्वर्य (Luxury) प्राप्त हो जाते हैं।