हुमायूँज़ टॉम्ब को समझने के लिए सबसे पहले इसका Mughal Architecture जानना बहुत जरूरी माना जाता है। यह भारत का पहला ऐसा बड़ा मकबरा है जिसमें लाल पत्थर और सफेद संगमरमर साथ में देखे जाते हैं। मकबरे की बनावट दूर से ही संतुलन और सुंदरता दिखा देती है। इसके चारों ओर फैले गार्डन भी इसकी पहचान हैं।
इस जगह को समझने के लिए यह भी जानना जरूरी है कि यह यूनेस्को का World Heritage Site है। इसलिए यहाँ इस्तेमाल हर पत्थर और डिजाइन को बचाने पर बहुत ध्यान रखा जाता है। पुराने समय के कारीगरों की मेहनत इस जगह पर साफ दिखाई देती है। इसीलिए लोग इसे इतिहास और कला का सच्चा मिश्रण मानते हैं।
यहाँ आने वाले लोगों को यह जानकर भी खुशी होती है कि हुमायूँज़ टॉम्ब पूरे एरिया में चारबाग शैली का सबसे सुंदर उदाहरण है। इस शैली में चार हिस्सों में बंटे बड़े गार्डन होते हैं। पानी की नहरें भी इस शैली को पूरा करती हैं। यह सब मिलकर एक शांत और भव्य वातावरण बनाते हैं।
यह भी समझ लेना चाहिए कि इस मकबरे की देखभाल पर काफी मेहनत की जाती है। कई बार यहाँ बहाली का काम भी किया जाता है ताकि असली डिजाइन सुरक्षित रह सके। अगर कोई इतिहास या कला का प्रेमी है तो उसे यहाँ की हर बारीकी समझ में आती है।
लोग अक्सर कहते हैं कि हुमायूँज़ टॉम्ब सिर्फ एक मकबरा नहीं बल्कि एक पूरा सांस्कृतिक खजाना है। इसकी सुंदरता हर मौसम में अलग दिखाई देती है। रोशनी पड़ने पर इसकी बनावट और भी निखर जाती है। इसलिए यहाँ आने का अनुभव हमेशा याद रहता है।