हम अक्सर expect करते हैं कि दोस्ती हमेशा बराबरी से चले, लेकिन practical जीवन में phase बदलते रहते हैं—कुछ busy हो जाते हैं, कुछ priorities shift कर लेते हैं।
पहला कदम—emotion को calm करके देखें कि क्या ये “feeling” है या सच में व्यवहार बदल गया है।
दूसरा—एक दोस्त को personal message करके open conversation करें:
“यार, मुझे लग रहा है कि हम पहले जितना बात नहीं कर पाते। सब ठीक है?”
यह blame नहीं, clarity लाता है।
तीसरा—देखें क्या आप हमेशा giving mode में हैं और सामने वाला only taking? उस case में boundaries बनाना आवश्यक है।
चौथा—अपने social circle को expand करें। Only 1-2 दोस्त पर emotional dependency रखने से imbalance बढ़ता है।
धीरे-धीरे आप महसूस करेंगे कि आपकी social value बढ़ती है और insecurity कम होती है।