comparison परिवारों में सबसे common problem है, खासकर जेठानी और देवरानी के बीच। जब तुलना बार-बार हो, तो मन टूटता है और दिल में कड़वाहट आती है। ऐसे में सबसे पहले खुद को शांत रखना जरूरी है। जब सोच positive रहती है, तो तनाव धीमे-धीमे कम होता है। अपने प्रयासों को पहचानना और खुद की value समझना बहुत मदद करता है।
परिवार में कई बार तुलना बिना कारण की जाती है, इसलिए बातों को दिल पर नहीं लेना चाहिए। अगर कोई कुछ कह दे, तो तुरंत react न करें। हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं होता। शांत रहकर सोचना ज़्यादा सही होता है। इससे मन भी शांत रहता है और रिश्ते भी खराब नहीं होते।
अगर किसी बात से दिल दुखे, तो सम्मानजनक तरीके से बात रखी जा सकती है। शब्दों का सही चयन रिश्ते को संभालने में मदद करता है। बिना गुस्सा किए अपनी feelings बताने से सामने वाला भी सोच में पड़ जाता है। कई बार लोग पहचान ही नहीं पाते कि उनकी बातों से किसी को दुख हुआ है। इसलिए साफ़ communication बहुत जरूरी है।
comparison की वजह से दूरी न बढ़े, इसलिए दोनों को चाहिए कि आपस में positivity बनाए रखें। छोटे-छोटे कामों में help करें, साथ बैठकर बात करें और family bonding मजबूत करें। जब बीच में warmth रहती है, तो comparison का असर कम होने लगता है। दिल में softness बनाए रखना रिश्ते को मजबूत करता है।
अपने self-confidence को भी strong रखना बहुत जरूरी है। अगर मन में विश्वास हो, तो कोई भी comparison प्रभावित नहीं करता। अपनी qualities को पहचानना और अपने काम में sincerity रखना हमेशा मददगार होता है। धीरे-धीरे comparison की बातों का असर खत्म होने लगता है और मन शांत रहता है। ऐसा व्यवहार घर के माहौल को भी positive बनाता है।