भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला (Oldest Mountain Range) अरावली पर्वत श्रृंखला (Aravalli Range) है। यह विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वतों (Fold Mountains) में से एक है, जिसकी भूवैज्ञानिक आयु (geological age) लगभग 600 मिलियन (million) वर्ष से भी अधिक मानी जाती है। इसका निर्माण उस समय हुआ था जब पृथ्वी पर पर्वतों का निर्माण (mountain building) शुरू हो रहा था।
अरावली श्रृंखला मुख्य रूप से भारत के पश्चिमी भाग (western part) में फैली हुई है, जो उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा (north-east to south-west direction) में चलती है। यह दिल्ली (Delhi) के पास से शुरू होती है, हरियाणा (Haryana) और राजस्थान (Rajasthan) से होकर गुजरती है, और गुजरात (Gujarat) में समाप्त होती है। राजस्थान में इसका विस्तार (extension) सबसे अधिक और स्पष्ट (clear) है।
चूँकि यह बहुत पुरानी पर्वत श्रृंखला है, यह लाखों वर्षों के अपरदन (Erosion) और मौसमी बदलावों (weathering) के कारण अब अपनी मूल ऊँचाई (original height) खो चुकी है। आज यह एक अवशिष्ट पर्वत श्रृंखला (Relict Mountain Range) के रूप में दिखाई देती है, जिसमें शिखर (peaks) गोल और कम ऊँचे हैं। इसकी सबसे ऊँची चोटी (highest peak) गुरु शिखर (Guru Shikhar) है, जो राजस्थान के माउंट आबू (Mount Abu) में स्थित है।
अरावली श्रृंखला राजस्थान के रेगिस्तान (Rajasthan Desert) के प्रसार (spread) को रोकने में एक महत्वपूर्ण भौगोलिक बाधा (geographical barrier) के रूप में कार्य करती है। यह मानसून (Monsoon) की अरब सागर शाखा से आने वाली नमी को रोकती है, जिसके कारण इसके पश्चिमी क्षेत्र (western region) में कम वर्षा होती है। यह क्षेत्र कई प्राचीन नदियों (ancient rivers) का स्रोत (source) भी है, जिनमें लूनी (Luni) और साबरमती (Sabarmati) शामिल हैं।
यह पर्वत श्रृंखला अपने समृद्ध खनिज संसाधनों (mineral resources) के लिए भी जानी जाती है, जैसे कि ताँबा (Copper), सीसा (Lead) और जस्ता (Zinc)। भूवैज्ञानिक (geologists) और पर्यावरणविदों (environmentalists) के लिए अरावली का संरक्षण (conservation) अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्तरी भारतीय मैदानों और पश्चिमी रेगिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक सेतु (ecological bridge) का काम करती है।