वह जलसंधि (Strait) जो एशिया (Asia) को उत्तरी अमेरिका (North America) से अलग करती है, बेरिंग जलसंधि (Bering Strait) है। यह एक संकीर्ण (narrow) जलमार्ग (waterway) है जो उत्तरी प्रशांत महासागर (North Pacific Ocean) को आर्कटिक महासागर (Arctic Ocean) के बेरिंग सागर (Bering Sea) से जोड़ता है। यह भूवैज्ञानिक (geological) और ऐतिहासिक रूप से (historically) बहुत महत्वपूर्ण है।
बेरिंग जलसंधि के पश्चिम (west) में रूस (Russia) का साइबेरिया (Siberia) (एशियाई महाद्वीप) और पूर्व (east) में संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) का अलास्का (Alaska) (उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप) स्थित है। जलसंधि की सबसे संकीर्ण चौड़ाई (narrowest width) केवल लगभग 85 किलोमीटर है, जिससे यह एशिया और उत्तरी अमेरिका के बीच निकटतम (closest) बिंदु बन जाता है।
इस जलसंधि के बीच में डियामेडे द्वीप समूह (Diomede Islands) स्थित हैं। यह द्वीप समूह दो भागों में विभाजित है: छोटा डियामेडे (Little Diomede) जो संयुक्त राज्य अमेरिका का है, और बड़ा डियामेडे (Big Diomede) जो रूस का है। इन दोनों द्वीपों के बीच की दूरी केवल लगभग 3.8 किलोमीटर है।
बेरिंग जलसंधि अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line - IDL) के बहुत करीब स्थित है। बड़ा डियामेडे (रूस) लगभग 21 घंटे आगे (ahead) है छोटा डियामेडे (USA) से, हालाँकि उनके बीच की भौतिक दूरी बहुत कम है। यह एक अद्वितीय (unique) भौगोलिक विरोधाभास (geographical paradox) पैदा करता है।
बेरिंग जलसंधि का सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और मानवशास्त्रीय (anthropological) महत्व यह है कि माना जाता है कि हिमयुग (Ice Age) के दौरान, समुद्र का स्तर (sea level) कम होने पर, यह क्षेत्र एक बेरिंग भूमि सेतु (Bering Land Bridge) था। इस भूमि सेतु ने ही प्रारंभिक मानवों (early humans) को एशिया से उत्तरी अमेरिका में प्रवास (migrate) करने का मार्ग प्रदान किया था।