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बच्चों में जिद (stubbornness) और नखरे (tantrums) आना उनके विकास (development) का एक सामान्य हिस्सा है, खासकर 2 से 4 साल की उम्र में, जिसे टेरिबल टूज़ (Terrible Twos) कहा जाता है। इन नखरों को संभालना पेरेंट्स के लिए चुनौती भरा हो सकता है, लेकिन शांत (calm) और दृढ़ (firm) रहना सबसे महत्वपूर्ण है। नखरे अक्सर तब आते हैं जब बच्चे अपनी भावनाओं (emotions) को शब्दों में व्यक्त (express) नहीं कर पाते।

पहला कदम यह समझना है कि नखरे अक्सर ध्यान आकर्षित (seeking attention) करने का एक तरीका होते हैं। ऐसे में, जब बच्चा ज़ोर-ज़ोर से रो रहा हो या चिल्ला रहा हो, तो शांत रहें और उनकी तरफ तुरंत प्रतिक्रिया (react) न दें। यदि नखरा सार्वजनिक स्थान (public place) पर है, तो बच्चे को एक शांत कोने (quiet corner) में ले जाएँ। बच्चों को यह सिखाना ज़रूरी है कि गुस्सा (anger) व्यक्त करने के स्वस्थ तरीके (healthy ways) क्या हैं।

जिद और नखरों को कम करने का एक प्रभावी तरीका सीमाएँ निर्धारित करना (setting boundaries) है। बच्चों को स्पष्ट (clear) नियम और अपेक्षाएँ (expectations) बताएँ और उन पर कायम रहें। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी खिलौने (toy) को खरीदने से मना कर रहे हैं, तो अपने फैसले पर दृढ़ रहें। यदि आप बाद में मान जाते हैं, तो बच्चा सीखता है कि जिद करने से उसकी बात मान ली जाएगी। दृढ़ता (consistency) यहाँ कुंजी (key) है।

जब बच्चा शांत हो जाए, तब उससे बात करें। उसे प्यार से समझाएँ कि उसका व्यवहार (behaviour) गलत क्यों था और उसे अपनी भावनाएँ (feelings) कैसे व्यक्त करनी चाहिए। बच्चों को उनकी भावनाओं को पहचानने (identifying emotions) में मदद करें, जैसे "मुझे पता है कि तुम गुस्सा हो।" इससे वे खुद को समझा हुआ (understood) महसूस करते हैं। यह उन्हें भावनाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित (regulate) करने में मदद करता है।

नकारात्मक व्यवहार (negative behaviour) पर ध्यान देने के बजाय, उनके सकारात्मक व्यवहार (positive behaviour) को प्रोत्साहित (encourage) करें। जब बच्चा सहयोग (cooperation) करता है या अपनी बात शांति से कहता है, तो उसकी प्रशंसा करें और उसे पुरस्कृत (reward) करें। एक और महत्वपूर्ण टिप यह है कि ट्रिगर (triggers) की पहचान करें। क्या आपका बच्चा थका हुआ (tired), भूखा (hungry) या ऊब (bored) गया है? अक्सर इन ज़रूरतों को पूरा करने से नखरे आने की संभावना कम हो जाती है।

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बच्चों में जिद (stubbornness) और नखरे (tantrums) आना उनके विकास (development) का एक सामान्य हिस्सा है, खासकर 2 से 4 साल की उम्र में, जिसे टेरिबल टूज़ (Terrible Twos) कहा जाता है। इन नखरों को संभालना पेरेंट्स के लिए चुनौती भरा हो सकता है, लेकिन शांत (calm) और दृढ़ (firm) रहना सबसे महत्वपूर्ण है। नखरे अक्सर तब आते हैं जब बच्चे अपनी भावनाओं (emotions) को शब्दों में व्यक्त (express) नहीं कर पाते।

पहला कदम यह समझना है कि नखरे अक्सर ध्यान आकर्षित (seeking attention) करने का एक तरीका होते हैं। ऐसे में, जब बच्चा ज़ोर-ज़ोर से रो रहा हो या चिल्ला रहा हो, तो शांत रहें और उनकी तरफ तुरंत प्रतिक्रिया (react) न दें। यदि नखरा सार्वजनिक स्थान (public place) पर है, तो बच्चे को एक शांत कोने (quiet corner) में ले जाएँ। बच्चों को यह सिखाना ज़रूरी है कि गुस्सा (anger) व्यक्त करने के स्वस्थ तरीके (healthy ways) क्या हैं।

जिद और नखरों को कम करने का एक प्रभावी तरीका सीमाएँ निर्धारित करना (setting boundaries) है। बच्चों को स्पष्ट (clear) नियम और अपेक्षाएँ (expectations) बताएँ और उन पर कायम रहें। उदाहरण के लिए, यदि आप किसी खिलौने (toy) को खरीदने से मना कर रहे हैं, तो अपने फैसले पर दृढ़ रहें। यदि आप बाद में मान जाते हैं, तो बच्चा सीखता है कि जिद करने से उसकी बात मान ली जाएगी। दृढ़ता (consistency) यहाँ कुंजी (key) है।

जब बच्चा शांत हो जाए, तब उससे बात करें। उसे प्यार से समझाएँ कि उसका व्यवहार (behaviour) गलत क्यों था और उसे अपनी भावनाएँ (feelings) कैसे व्यक्त करनी चाहिए। बच्चों को उनकी भावनाओं को पहचानने (identifying emotions) में मदद करें, जैसे "मुझे पता है कि तुम गुस्सा हो।" इससे वे खुद को समझा हुआ (understood) महसूस करते हैं। यह उन्हें भावनाओं को बेहतर ढंग से नियंत्रित (regulate) करने में मदद करता है।

नकारात्मक व्यवहार (negative behaviour) पर ध्यान देने के बजाय, उनके सकारात्मक व्यवहार (positive behaviour) को प्रोत्साहित (encourage) करें। जब बच्चा सहयोग (cooperation) करता है या अपनी बात शांति से कहता है, तो उसकी प्रशंसा करें और उसे पुरस्कृत (reward) करें। एक और महत्वपूर्ण टिप यह है कि ट्रिगर (triggers) की पहचान करें। क्या आपका बच्चा थका हुआ (tired), भूखा (hungry) या ऊब (bored) गया है? अक्सर इन ज़रूरतों को पूरा करने से नखरे आने की संभावना कम हो जाती है।
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