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बच्चे के बोलना (speaking) शुरू करने की प्रक्रिया जन्म के तुरंत बाद से ही शुरू हो जाती है, जिसे अक्सर भाषा विकास (language development) कहा जाता है। हालाँकि, पहले अर्थपूर्ण शब्द (meaningful words) आमतौर पर लगभग 12 महीने (one year) की उम्र के आसपास सुनाई देते हैं। यह एक बहुत ही व्यक्तिगत (individual) मील का पत्थर (milestone) है, और कुछ बच्चे इससे थोड़ा पहले या बाद में भी बोलना शुरू कर सकते हैं। माता-पिता को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनका बच्चा संचार (communication) करने की कोशिश कर रहा है या नहीं, न कि सिर्फ शब्दों पर।

बोलने के शुरुआती संकेत (early signs) बच्चे के जन्म के पहले कुछ महीनों में ही दिखना शुरू हो जाते हैं। कूइंग (cooing), जो कि सुखद (pleasant) स्वरों की ध्वनि होती है, और बैबलिंग (babbling), जिसमें "मा-मा" या "दा-दा" जैसी व्यंजन (consonant) और स्वर ध्वनियाँ (vowel sounds) शामिल होती हैं, प्रमुख शुरुआती संकेत हैं। लगभग 6 से 9 महीने की उम्र में, बच्चे अपने नाम (name) पर प्रतिक्रिया (respond) देना शुरू कर देते हैं और यह समझते हैं कि आवाजें ध्यान आकर्षित (attract attention) करने का एक तरीका हैं।

लगभग 9 से 12 महीने की उम्र तक, बच्चे इशारों (gestures) का उपयोग करना शुरू कर देते हैं, जैसे हाथ हिलाकर 'बाय-बाय' कहना या अपनी पसंद की चीज़ों की तरफ इशारा करना। यह गैर-मौखिक संचार (non-verbal communication) बोलने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार (foundation) बनाता है। जब बच्चे पहली बार कोई शब्द बोलते हैं, तो यह अक्सर एक ऐसा शब्द होता है जो उनके दैनिक जीवन (daily life) से संबंधित होता है, जैसे 'मम्मा', 'बाबा' या किसी जानवर का नाम।

माता-पिता को बच्चे के भाषा विकास (language development) को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से शामिल (actively involved) होना चाहिए। बच्चे से लगातार (constantly) बात करें, भले ही वह समझ न पाए। जब आप बच्चे को कपड़े पहना रहे हों, खाना खिला रहे हों या खेल रहे हों, तो इन गतिविधियों का वर्णन (describe) करें। बच्चे को कहानियाँ (stories) पढ़कर सुनाना और नर्सरी राइम्स (nursery rhymes) गाना भी उनके शब्दावली (vocabulary) और ध्वनि ज्ञान (phonological awareness) को बढ़ाता है।

यदि आपका बच्चा 18 महीने का होने के बाद भी केवल कुछ ही शब्द बोल रहा है या 2 साल की उम्र तक दो-शब्दों के वाक्यांश (two-word phrases) नहीं बना पा रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ (paediatrician) से परामर्श (consultation) लेना आवश्यक है। हालाँकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि प्रत्येक बच्चा अपनी गति (own pace) से विकसित होता है। अगर बच्चा आपकी बातें समझ रहा है (receptive language) और इशारों से संवाद (communicate) कर रहा है, तो यह एक अच्छा संकेत है।

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बच्चे के बोलना (speaking) शुरू करने की प्रक्रिया जन्म के तुरंत बाद से ही शुरू हो जाती है, जिसे अक्सर भाषा विकास (language development) कहा जाता है। हालाँकि, पहले अर्थपूर्ण शब्द (meaningful words) आमतौर पर लगभग 12 महीने (one year) की उम्र के आसपास सुनाई देते हैं। यह एक बहुत ही व्यक्तिगत (individual) मील का पत्थर (milestone) है, और कुछ बच्चे इससे थोड़ा पहले या बाद में भी बोलना शुरू कर सकते हैं। माता-पिता को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनका बच्चा संचार (communication) करने की कोशिश कर रहा है या नहीं, न कि सिर्फ शब्दों पर।

बोलने के शुरुआती संकेत (early signs) बच्चे के जन्म के पहले कुछ महीनों में ही दिखना शुरू हो जाते हैं। कूइंग (cooing), जो कि सुखद (pleasant) स्वरों की ध्वनि होती है, और बैबलिंग (babbling), जिसमें "मा-मा" या "दा-दा" जैसी व्यंजन (consonant) और स्वर ध्वनियाँ (vowel sounds) शामिल होती हैं, प्रमुख शुरुआती संकेत हैं। लगभग 6 से 9 महीने की उम्र में, बच्चे अपने नाम (name) पर प्रतिक्रिया (respond) देना शुरू कर देते हैं और यह समझते हैं कि आवाजें ध्यान आकर्षित (attract attention) करने का एक तरीका हैं।

लगभग 9 से 12 महीने की उम्र तक, बच्चे इशारों (gestures) का उपयोग करना शुरू कर देते हैं, जैसे हाथ हिलाकर 'बाय-बाय' कहना या अपनी पसंद की चीज़ों की तरफ इशारा करना। यह गैर-मौखिक संचार (non-verbal communication) बोलने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार (foundation) बनाता है। जब बच्चे पहली बार कोई शब्द बोलते हैं, तो यह अक्सर एक ऐसा शब्द होता है जो उनके दैनिक जीवन (daily life) से संबंधित होता है, जैसे 'मम्मा', 'बाबा' या किसी जानवर का नाम।

माता-पिता को बच्चे के भाषा विकास (language development) को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से शामिल (actively involved) होना चाहिए। बच्चे से लगातार (constantly) बात करें, भले ही वह समझ न पाए। जब आप बच्चे को कपड़े पहना रहे हों, खाना खिला रहे हों या खेल रहे हों, तो इन गतिविधियों का वर्णन (describe) करें। बच्चे को कहानियाँ (stories) पढ़कर सुनाना और नर्सरी राइम्स (nursery rhymes) गाना भी उनके शब्दावली (vocabulary) और ध्वनि ज्ञान (phonological awareness) को बढ़ाता है।

यदि आपका बच्चा 18 महीने का होने के बाद भी केवल कुछ ही शब्द बोल रहा है या 2 साल की उम्र तक दो-शब्दों के वाक्यांश (two-word phrases) नहीं बना पा रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ (paediatrician) से परामर्श (consultation) लेना आवश्यक है। हालाँकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि प्रत्येक बच्चा अपनी गति (own pace) से विकसित होता है। अगर बच्चा आपकी बातें समझ रहा है (receptive language) और इशारों से संवाद (communicate) कर रहा है, तो यह एक अच्छा संकेत है।
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