बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग (Potty Training) शुरू करने का कोई निश्चित समय (fixed time) नहीं होता है, क्योंकि यह पूरी तरह से बच्चे की शारीरिक (physical) और भावनात्मक तत्परता (emotional readiness) पर निर्भर करता है। माता-पिता को आमतौर पर 18 महीने से 3 साल (18 months to 3 years) की उम्र के बीच संकेतों (signs) की तलाश शुरू कर देनी चाहिए। जल्दी शुरू करने से निराशा (frustration) हो सकती है, इसलिए सही समय की पहचान करना महत्वपूर्ण है।
तैयारी के कुछ शारीरिक संकेत (physical signs) हैं: बच्चा कम से कम दो घंटे (two hours) तक सूखा (dry) रहता है, वह अपनी खुद की डायपर (diaper) की गंदी अवस्था (dirty state) से अवगत (aware) हो जाता है, और वह स्थिर (steady) रूप से बैठ (sit) सकता है। व्यवहारिक संकेत (behavioural signs) में शामिल हैं: बच्चा अपनी बात को शब्दों (words) या इशारों (gestures) में बता सकता है, वह आपकी नकल (imitate) करना चाहता है, और वह साधारण निर्देशों (simple instructions) का पालन (follow) कर सकता है।
पॉटी ट्रेनिंग शुरू करने का तरीका सकारात्मक (positive) और धीमा (slow) होना चाहिए। पहले एक आकर्षक (attractive) और आरामदायक (comfortable) पॉटी सीट (potty seat) खरीदें और उसे ऐसी जगह पर रखें जहाँ बच्चे की पहुँच (reach) हो। बच्चे को कपड़े पहने हुए भी उस पर बैठने दें ताकि वह उससे परिचित (familiar) हो सके। इसे एक मजेदार खेल (fun game) की तरह पेश करें, न कि एक कठोर कार्य (strict task) की तरह।
बच्चे को दिन में कुछ बार, खासकर खाने के बाद या उठने के बाद, निश्चित समय (scheduled times) पर पॉटी पर बैठने के लिए प्रोत्साहित करें। शुरुआत में उन्हें सिर्फ कुछ मिनटों (few minutes) के लिए बैठने दें। जब बच्चा पॉटी का सफलतापूर्वक उपयोग (successfully use) करता है, तो उसे तुरंत और उत्साहपूर्वक प्रशंसा (praise) करें। सफलता के लिए छोटा पुरस्कार (reward) दें, जैसे कि एक स्टिकर (sticker) या ताली (clapping)।
पॉटी ट्रेनिंग के दौरान दुर्घटनाएँ (accidents) होना पूरी तरह से सामान्य है। माता-पिता को कभी भी बच्चे पर गुस्सा (anger) नहीं करना चाहिए या सज़ा (punishment) नहीं देनी चाहिए। शांत रहें और कपड़े बदल दें, यह कहकर कि "कोई बात नहीं, अगली बार कोशिश करो।" रात की ट्रेनिंग (night training) दिन की ट्रेनिंग से अलग होती है और इसे आमतौर पर बाद में शुरू किया जाता है। सफलता की कुंजी (key to success) धैर्य (patience), दृढ़ता (consistency) और बच्चे की तत्परता (readiness) का सम्मान करना है।