विराट कोहली (Virat Kohli) को 'चेस मास्टर' (Chase Master) या 'रन चेस का बादशाह' (King of Run Chases) कहा जाता है क्योंकि उनके वनडे इंटरनेशनल (ODI International) करियर (career) में लक्ष्य का पीछा (chasing targets) करते हुए उनका प्रदर्शन (performance) अविश्वसनीय (unbelievable) रूप से मजबूत (strong) रहा है। लक्ष्य का पीछा करते समय उनकी सफलता दर (success rate) और शतकों की संख्या (number of centuries) उन्हें इस उपनाम (nickname) का हकदार बनाती है।
'चेस मास्टर' (Chase Master) कहे जाने का मुख्य कारण यह है कि जब भारत दूसरी पारी (second innings) में बल्लेबाजी (batting) करता है, तो उनका बल्लेबाजी औसत (batting average) पहली पारी की तुलना (compared to first innings) में काफी अधिक होता है। दबाव (pressure) में भी उनका अडिग रहना (unwavering) और टीम को जीत (win) तक ले जाने की उनकी क्षमता (ability) उन्हें सबसे अलग (stand out) करती है।
लक्ष्य का पीछा (chasing targets) करते समय, कोहली जोखिम प्रबंधन (risk management) में महारत (mastery) दिखाते हैं। वह जानते हैं कि कब आक्रामक (aggressive) होना है और कब सिंगल्स (singles) लेकर स्ट्राइक रोटेट (rotate strike) करनी है। उनकी यह मानसिक स्पष्टता (mental clarity) उन्हें दबाव (pressure) में भी सही निर्णय (right decisions) लेने में मदद करती है।
उनके कई शानदार शतक (brilliant centuries) ऐसे हैं जब टीम इंडिया (Team India) एक कठिन लक्ष्य (difficult target) का पीछा कर रही थी। उदाहरण के लिए, होबार्ट (Hobart) में श्रीलंका (Sri Lanka) के खिलाफ 86 गेंदों में बनाया गया उनका 133 रन या एशिया कप (Asia Cup) में पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ बनाए गए उनके 183 रन उनकी चेज़िंग क्षमता (chasing ability) के बेहतरीन उदाहरण हैं।
यह उपनाम (nickname) केवल आँकड़ों (statistics) पर आधारित नहीं है, बल्कि कठिन परिस्थितियों (difficult situations) में उनकी मानसिकता (mentality) को दर्शाता है। वह एक बार पिच (pitch) पर सेट (set) हो जाने के बाद, मैच खत्म (finish the match) करके ही वापस जाते हैं, जो उन्हें क्रिकेट इतिहास (cricket history) के सबसे महान फिनिशरों (finishers) में से एक बनाता है।