MS Dhoni (एमएस धोनी) ने विकेटकीपिंग की पारंपरिक तकनीक में बड़े बदलाव किए हैं। उनकी सबसे प्रभावशाली क्षमता बिजली की गति से स्टंपिंग (Fastest Stumping) करना है। वे गेंद को पकड़ने के बाद अपने हाथों को पीछे खींचने के बजाय सीधे स्टंप्स की ओर ले जाते हैं, जिससे सेकंड के सौवें हिस्से की बचत होती है। यह अनोखी तकनीक उन्हें दुनिया के किसी भी अन्य विकेटकीपर से अधिक तेज और सटीक बनाती है।
धोनी की एकाग्रता मैदान पर बहुत अधिक होती है, जिससे वे स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ बहुत प्रभावी हो जाते हैं। वे अक्सर गेंदबाजों को सलाह देते हैं कि बल्लेबाज की गतिविधियों के आधार पर गेंद कहाँ फेंकनी है। स्टंप के पीछे से उनके द्वारा दिए गए निर्देश जैसे "ये थोड़ा आगे डालेगा तो फँसेगा" अक्सर सच साबित होते हैं। वे न केवल कीपिंग करते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्ररक्षण (Fielding) को नियंत्रित करते हैं।
उनकी आँखों और हाथों का समन्वय (Hand-Eye Coordination) इतना जबरदस्त है कि वे बिना देखे भी स्टंप्स पर थ्रो मारने में सक्षम हैं। धोनी ने विकेटकीपिंग को केवल एक सुरक्षात्मक भूमिका से बदलकर एक आक्रामक हथियार बना दिया है। उनके दस्तानों की हरकत इतनी सूक्ष्म होती है कि बल्लेबाज को पता भी नहीं चलता कि कब उसकी गिल्लियाँ उड़ गईं। यह कौशल उन्हें 'गेम चेंजर' बनाता है।
विकेट के पीछे खड़े होकर वे पिच की स्थिति को भांपने में माहिर हैं। वे जानते हैं कि गेंद कब टर्न होगी और कब सीधी रहेगी। धोनी अक्सर स्पिनरों को अपनी योजना के अनुसार गेंदबाजी करने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे भारत को कई महत्वपूर्ण विकेट मिले हैं। रवींद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गज गेंदबाजों की सफलता में धोनी की विकेटकीपिंग का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
धोनी की यह शैली अब आधुनिक क्रिकेट में मानक बन गई है। कई उभरते हुए विकेटकीपर उनके वीडियो देखकर उनकी तकनीक सीखने की कोशिश करते हैं। उन्होंने दिखाया है कि विकेटकीपर केवल गेंद पकड़ने वाला खिलाड़ी नहीं, बल्कि टीम का दूसरा कप्तान होता है। धोनी की विकेटकीपिंग ने भारतीय क्रिकेट को एक नई पहचान दी है और कई रोमांचक मैचों में जीत सुनिश्चित की है।