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गठबंधन सरकार (Coalition Government) तब बनती है जब किसी भी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत (Clear Majority) प्राप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में कई दल मिलकर न्यूनतम साझा कार्यक्रम (Minimum Common Programme) के आधार पर सत्ता चलाते हैं। इसकी सबसे बड़ी चुनौती 'अस्थिरता' है, क्योंकि यदि कोई छोटा सहयोगी दल भी समर्थन वापस ले ले, तो सरकार गिरने का खतरा बना रहता है। इससे अक्सर बड़े नीतिगत निर्णयों (Policy Decisions) में देरी होती है क्योंकि सभी सहयोगियों को सहमत करना पड़ता है।

क्षेत्रीय दलों (Regional Parties) की बढ़ती भूमिका गठबंधन राजनीति की एक मुख्य विशेषता है। ये दल अक्सर राष्ट्रीय हितों के बजाय अपने राज्यों की विशिष्ट मांगों (Regional Demands) को प्राथमिकता देते हैं। कई बार सरकार को ब्लैकमेल (Political Pressure) जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहाँ सहयोगी दल अपनी शर्तों को मनवाने के लिए दबाव डालते हैं। इसे 'गठबंधन का विवश धर्म' भी कहा जाता है, जहाँ प्रधानमंत्री की शक्तियां कुछ हद तक सीमित हो जाती हैं।

सकारात्मक पक्ष यह है कि ऐसी सरकारें अधिक समावेशी (Inclusive) होती हैं। चूंकि इसमें अलग-अलग विचारधाराओं और क्षेत्रों के दल शामिल होते हैं, इसलिए समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व बेहतर होता है। कोई भी एक दल अपनी मनमानी (Dictatorial Tendencies) नहीं कर सकता और हर बड़े कानून पर व्यापक चर्चा (Wider Consultation) होती है। यह संघीय ढांचे (Federal Structure) को मजबूत बनाता है क्योंकि राज्यों की आवाज केंद्र में अधिक प्रभावशाली ढंग से सुनी जाती है।

प्रशासनिक स्तर पर गठबंधन सरकारों में 'भ्रष्टाचार' (Corruption) का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि सत्ता के कई केंद्र बन जाते हैं। मंत्रियों के चयन में योग्यता (Merit) के बजाय राजनीतिक मजबूरी को अधिक महत्व दिया जाता है ताकि सहयोगियों को खुश रखा जा सके। विभागों के बंटवारे को लेकर अक्सर खींचतान बनी रहती है, जिससे शासन की गुणवत्ता (Governance Quality) प्रभावित हो सकती है। सरकार का पूरा ध्यान अक्सर देश चलाने के बजाय अपना कार्यकाल बचाने पर केंद्रित रहता है।

भारतीय राजनीति (Indian Politics) में 1989 से 2014 तक का दौर गठबंधन युग के रूप में देखा गया। इस दौरान हमने अस्थिर सरकारें भी देखीं और विकास की तेज रफ्तार भी। वर्तमान में पूर्ण बहुमत की सरकारें होने के बावजूद बड़े दल छोटे सहयोगियों के साथ गठबंधन (Alliances) बनाए रखते हैं ताकि जनाधार बढ़ाया जा सके। गठबंधन की राजनीति यह सिखाती है कि लोकतंत्र में संवाद और समझौता (Compromise and Dialogue) ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है।

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गठबंधन सरकार (Coalition Government) तब बनती है जब किसी भी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत (Clear Majority) प्राप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में कई दल मिलकर न्यूनतम साझा कार्यक्रम (Minimum Common Programme) के आधार पर सत्ता चलाते हैं। इसकी सबसे बड़ी चुनौती 'अस्थिरता' है, क्योंकि यदि कोई छोटा सहयोगी दल भी समर्थन वापस ले ले, तो सरकार गिरने का खतरा बना रहता है। इससे अक्सर बड़े नीतिगत निर्णयों (Policy Decisions) में देरी होती है क्योंकि सभी सहयोगियों को सहमत करना पड़ता है।

क्षेत्रीय दलों (Regional Parties) की बढ़ती भूमिका गठबंधन राजनीति की एक मुख्य विशेषता है। ये दल अक्सर राष्ट्रीय हितों के बजाय अपने राज्यों की विशिष्ट मांगों (Regional Demands) को प्राथमिकता देते हैं। कई बार सरकार को ब्लैकमेल (Political Pressure) जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहाँ सहयोगी दल अपनी शर्तों को मनवाने के लिए दबाव डालते हैं। इसे 'गठबंधन का विवश धर्म' भी कहा जाता है, जहाँ प्रधानमंत्री की शक्तियां कुछ हद तक सीमित हो जाती हैं।

सकारात्मक पक्ष यह है कि ऐसी सरकारें अधिक समावेशी (Inclusive) होती हैं। चूंकि इसमें अलग-अलग विचारधाराओं और क्षेत्रों के दल शामिल होते हैं, इसलिए समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व बेहतर होता है। कोई भी एक दल अपनी मनमानी (Dictatorial Tendencies) नहीं कर सकता और हर बड़े कानून पर व्यापक चर्चा (Wider Consultation) होती है। यह संघीय ढांचे (Federal Structure) को मजबूत बनाता है क्योंकि राज्यों की आवाज केंद्र में अधिक प्रभावशाली ढंग से सुनी जाती है।

प्रशासनिक स्तर पर गठबंधन सरकारों में 'भ्रष्टाचार' (Corruption) का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि सत्ता के कई केंद्र बन जाते हैं। मंत्रियों के चयन में योग्यता (Merit) के बजाय राजनीतिक मजबूरी को अधिक महत्व दिया जाता है ताकि सहयोगियों को खुश रखा जा सके। विभागों के बंटवारे को लेकर अक्सर खींचतान बनी रहती है, जिससे शासन की गुणवत्ता (Governance Quality) प्रभावित हो सकती है। सरकार का पूरा ध्यान अक्सर देश चलाने के बजाय अपना कार्यकाल बचाने पर केंद्रित रहता है।

भारतीय राजनीति (Indian Politics) में 1989 से 2014 तक का दौर गठबंधन युग के रूप में देखा गया। इस दौरान हमने अस्थिर सरकारें भी देखीं और विकास की तेज रफ्तार भी। वर्तमान में पूर्ण बहुमत की सरकारें होने के बावजूद बड़े दल छोटे सहयोगियों के साथ गठबंधन (Alliances) बनाए रखते हैं ताकि जनाधार बढ़ाया जा सके। गठबंधन की राजनीति यह सिखाती है कि लोकतंत्र में संवाद और समझौता (Compromise and Dialogue) ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है।
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