जब हम कपड़ों को धोते हैं, तो पानी रेशों (Fibers) के भीतर गहराई तक चला जाता है। कपास (Cotton) जैसे प्राकृतिक रेशों में सेल्युलोज (Cellulose) होता है। गीले होने पर, पानी के अणु इन रेशों के बीच एक अस्थायी पुल बना देते हैं। जैसे-जैसे सूरज की गर्मी से पानी वाष्पित (Evaporate) होता है, ये रेशे एक-दूसरे के बहुत करीब आ जाते हैं। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन बॉन्ड (Hydrogen Bonds) फिर से जुड़ने लगते हैं, जिससे कपड़ा सख्त हो जाता है।
धूप में सुखाने पर पानी बहुत तेजी से निकलता है। इस तीव्र वाष्पीकरण (Rapid Evaporation) के कारण रेशों को हिलने-डुलने का मौका नहीं मिलता और वे एक स्थिर, कड़ी स्थिति में 'लॉक' हो जाते हैं। यदि हवा चल रही हो, तो कपड़े थोड़े नरम रहते हैं क्योंकि हवा रेशों को आपस में मजबूती से जुड़ने नहीं देती। इसके विपरीत, वाशिंग मशीन के ड्रायर में कपड़े निरंतर घूमते हैं, जिससे रेशों के बंधन लचीले बने रहते हैं।
पानी की गुणवत्ता भी कपड़ों की सख्ती (Stiffness) का एक बड़ा कारण है। यदि आपके क्षेत्र में 'खारा पानी' (Hard Water) आता है, तो उसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज (Minerals) अधिक होते हैं। सूखने के बाद, ये खनिज कपड़े के रेशों पर एक पतली परत के रूप में जम जाते हैं। यह परत रेशों को आपस में चिपका देती है, जिससे कपड़ा छूने में खुरदरा और कड़ा महसूस होता है।
कपड़े की बुनाई (Weaving) भी इसमें भूमिका निभाती है। मोटे और सघन बुनाई वाले कपड़े अधिक सख्त होते हैं क्योंकि उनमें पानी सोखने की क्षमता ज्यादा होती है। जब ये सूखते हैं, तो इनके रेशों के बीच घर्षण (Friction) बढ़ जाता है। डिटर्जेंट का अधिक इस्तेमाल भी रेशों के भीतर अवशेष छोड़ देता है, जो सूखने पर कपड़े को लचीला होने से रोकता है।
अंततः, कपड़ों का सख्त होना एक प्राकृतिक भौतिक प्रक्रिया (Physical Process) है। इसे कम करने के लिए अक्सर 'फैब्रिक सॉफ्टनर' (Fabric Softener) का उपयोग किया जाता है, जो रेशों पर एक चिकनी परत बना देते हैं। इससे हाइड्रोजन बॉन्ड मजबूती से नहीं बन पाते और कपड़े नरम रहते हैं। धूप में सुखाना कीटाणुओं को मारने के लिए तो अच्छा है, लेकिन रेशों के कड़ेपन का यह एक मुख्य वैज्ञानिक कारण है।