0 like 0 dislike
23 views
in General Knowledge by (220 points)
एक साधारण कांच (Glass) के पारदर्शी होने के कारण प्रकाश उसके आर-पार निकल जाता है, जिससे हम अपना प्रतिबिंब नहीं देख पाते। कांच को दर्पण (Mirror) बनाने के लिए उसके पिछले हिस्से पर एक अत्यंत परावर्तक धातु (Reflective Metal) की पतली परत चढ़ाई जाती है। पुराने समय में इसके लिए चांदी (Silver) का उपयोग किया जाता था क्योंकि यह दृश्य प्रकाश के 95% से अधिक हिस्से को परावर्तित कर सकती है।

आजकल लागत कम करने के लिए चांदी की जगह अक्सर एल्युमीनियम (Aluminium) का उपयोग किया जाता है। हालांकि चांदी सबसे अच्छी परावर्तक धातु है, लेकिन एल्युमीनियम सस्ता है और यह भी पर्याप्त चमक प्रदान करता है। इस प्रक्रिया को 'सिल्वरिंग' (Silvering) कहा जाता है, जिसमें रसायनों के माध्यम से धातु को कांच की सतह पर जमाया जाता है। यह परत इतनी पतली होती है कि इसे आंखों से अलग से देख पाना मुश्किल है।

दर्पण बनाने की प्रक्रिया में केवल धातु ही काफी नहीं होती। धातु की यह परत बहुत नाजुक होती है और हवा के संपर्क में आने पर इसमें जंग (Corrosion) लग सकता है या यह ऑक्सीडाइज हो सकती है। इसलिए, धातु की इस परत के ऊपर सुरक्षा के लिए 'पेंट' (Paint) की एक या दो परतें चढ़ाई जाती हैं। आमतौर पर यह पेंट गहरा लाल या ग्रे रंग का होता है, जो धातु को खरोंच और नमी से बचाता है।

जब प्रकाश की किरणें कांच के अगले हिस्से से प्रवेश करती हैं, तो वे पीछे लगी धातु की परत से टकराती हैं। धातु के मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons) प्रकाश की ऊर्जा को सोखकर उसे तुरंत वापस भेज देते हैं, जिसे हम 'परावर्तन' (Reflection) कहते हैं। क्योंकि धातु की सतह बहुत चिकनी (Smooth) होती है, इसलिए प्रकाश एक निश्चित कोण पर लौटता है, जिससे हमें अपनी स्पष्ट छवि दिखाई देती है।

वैज्ञानिक और औद्योगिक दर्पणों (जैसे टेलिस्कोप के दर्पण) में परावर्तक परत कांच के सामने वाले हिस्से पर लगाई जाती है ताकि प्रकाश को कांच के भीतर से न गुजरना पड़े। लेकिन हमारे घरों के दर्पणों में धातु पीछे होती है ताकि कांच उसे बाहरी नुकसान से बचा सके। यह धातु विज्ञान और प्रकाशिकी (Optics) का एक उत्कृष्ट मिश्रण है, जो हमें खुद को देखने की सुविधा देता है।

1 Answer

0 like 0 dislike
by (220 points)
एक साधारण कांच (Glass) के पारदर्शी होने के कारण प्रकाश उसके आर-पार निकल जाता है, जिससे हम अपना प्रतिबिंब नहीं देख पाते। कांच को दर्पण (Mirror) बनाने के लिए उसके पिछले हिस्से पर एक अत्यंत परावर्तक धातु (Reflective Metal) की पतली परत चढ़ाई जाती है। पुराने समय में इसके लिए चांदी (Silver) का उपयोग किया जाता था क्योंकि यह दृश्य प्रकाश के 95% से अधिक हिस्से को परावर्तित कर सकती है।

आजकल लागत कम करने के लिए चांदी की जगह अक्सर एल्युमीनियम (Aluminium) का उपयोग किया जाता है। हालांकि चांदी सबसे अच्छी परावर्तक धातु है, लेकिन एल्युमीनियम सस्ता है और यह भी पर्याप्त चमक प्रदान करता है। इस प्रक्रिया को 'सिल्वरिंग' (Silvering) कहा जाता है, जिसमें रसायनों के माध्यम से धातु को कांच की सतह पर जमाया जाता है। यह परत इतनी पतली होती है कि इसे आंखों से अलग से देख पाना मुश्किल है।

दर्पण बनाने की प्रक्रिया में केवल धातु ही काफी नहीं होती। धातु की यह परत बहुत नाजुक होती है और हवा के संपर्क में आने पर इसमें जंग (Corrosion) लग सकता है या यह ऑक्सीडाइज हो सकती है। इसलिए, धातु की इस परत के ऊपर सुरक्षा के लिए 'पेंट' (Paint) की एक या दो परतें चढ़ाई जाती हैं। आमतौर पर यह पेंट गहरा लाल या ग्रे रंग का होता है, जो धातु को खरोंच और नमी से बचाता है।

जब प्रकाश की किरणें कांच के अगले हिस्से से प्रवेश करती हैं, तो वे पीछे लगी धातु की परत से टकराती हैं। धातु के मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons) प्रकाश की ऊर्जा को सोखकर उसे तुरंत वापस भेज देते हैं, जिसे हम 'परावर्तन' (Reflection) कहते हैं। क्योंकि धातु की सतह बहुत चिकनी (Smooth) होती है, इसलिए प्रकाश एक निश्चित कोण पर लौटता है, जिससे हमें अपनी स्पष्ट छवि दिखाई देती है।

वैज्ञानिक और औद्योगिक दर्पणों (जैसे टेलिस्कोप के दर्पण) में परावर्तक परत कांच के सामने वाले हिस्से पर लगाई जाती है ताकि प्रकाश को कांच के भीतर से न गुजरना पड़े। लेकिन हमारे घरों के दर्पणों में धातु पीछे होती है ताकि कांच उसे बाहरी नुकसान से बचा सके। यह धातु विज्ञान और प्रकाशिकी (Optics) का एक उत्कृष्ट मिश्रण है, जो हमें खुद को देखने की सुविधा देता है।
Welcome to DailyLifeQnA, get your simple everyday question–answer hub experts community. Find quick, reliable, and easy explanations to common life problems, tips, and doubts—all in one place.

Related questions

...