भारत में सड़कों के किनारे लगे मील के पत्थर (Milestones) केवल दूरी बताने के लिए नहीं होते, बल्कि उनका रंग सड़क के प्रकार (Type of Road) की पहचान कराता है। यदि आप सड़क पर चलते समय पीले रंग (Yellow Color) की पट्टी वाला पत्थर देखते हैं, तो इसका अर्थ है कि आप एक राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) पर सफर कर रहे हैं। इन सड़कों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी केंद्र सरकार (Central Government) की होती है।
सफर के दौरान यदि आपको हरे रंग (Green Color) की पट्टी वाला पत्थर दिखाई दे, तो समझ जाइये कि वह एक राज्य राजमार्ग (State Highway) है। इन सड़कों का प्रबंधन पूरी तरह से राज्य सरकार (State Government) के अधीन होता है। यह रंग योजना यात्रियों को यह समझने में मदद करती है कि वे किस प्रशासनिक क्षेत्र (Administrative Zone) की सड़क का उपयोग कर रहे हैं।
काले, नीले या सफेद रंग (Black or White) की पट्टी वाले मील के पत्थर आमतौर पर बड़े शहरों (Big Cities) या जिला सड़कों (District Roads) को दर्शाते हैं। ये पत्थर बताते हैं कि आप किसी जिले की सीमा के भीतर हैं और इन सड़कों की देखभाल स्थानीय जिला प्रशासन या नगर निगम (Municipality) द्वारा की जाती है। यह वर्गीकरण यातायात प्रबंधन (Traffic Management) को सरल बनाने के लिए किया गया है।
नारंगी रंग (Orange Color) की पट्टी वाले पत्थर ग्रामीण सड़कों की पहचान हैं। ये पत्थर मुख्य रूप से 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना' (PMGSY) के अंतर्गत बनाई गई सड़कों पर लगाए जाते हैं। यह रंग यह संकेत देता है कि सड़क आपको किसी गांव (Village) की ओर ले जा रही है। भारत जैसे विशाल देश में सड़कों के जाल को समझने के लिए यह एक बहुत ही प्रभावी दृश्य संकेत (Visual Signal) है।
रंगों का यह उपयोग सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) के युग से पहले विकसित किया गया था ताकि अनपढ़ लोग भी रंगों को देखकर सड़क की श्रेणी पहचान सकें। इन पत्थरों पर स्थान का नाम और दूरी देवनागरी और अंग्रेजी (English) दोनों लिपियों में लिखी जाती है। यह पूरी व्यवस्था सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा एक निर्धारित मानक के अनुसार संचालित की जाती है।