भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले तेल, हल्दी और मसालों के जिद्दी दागों को लेकर अक्सर डिशवॉशर (Dishwasher) पर संदेह किया जाता है। हालांकि, आधुनिक डिशवॉशर विशेष रूप से 'कढ़ाई मोड' (Kadhai Mode) या इंटेंसिव वॉश (Intensive Wash) के साथ आते हैं। ये मशीनें 70 डिग्री सेल्सियस तक गर्म पानी (Hot Water) का उपयोग करती हैं, जो हाथों से सफाई के मुकाबले कीटाणुओं (Bacteria) और चिकनाई को बेहतर तरीके से खत्म करता है।
बर्तनों को लोड करने का तरीका (Loading Method) इसकी सफलता की कुंजी है। यदि बर्तनों को सही खांचों में उल्टा रखा जाए, तो पानी की बौछारें हर कोने तक पहुँचती हैं। स्टील, कांच और सिरेमिक के बर्तनों के लिए यह पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन लकड़ी या अनकोटेड एल्यूमीनियम (Aluminum) के बर्तनों को इसमें धोने से बचना चाहिए क्योंकि वे खराब हो सकते हैं।
डिशवॉशर के उपयोग से पानी की बचत (Water Saving) भी होती है। शोध बताते हैं कि बहते नल के नीचे बर्तन धोने में जितना पानी खर्च होता है, डिशवॉशर उससे लगभग 80% कम पानी में पूरे परिवार के बर्तन साफ कर देता है। इसमें डिटर्जेंट (Detergent), साल्ट (Salt) और रिंस एड (Rinse Aid) का सही संयोजन बर्तनों को चमकदार और सूखा (Sparkling Dry) बनाता है।
समय और मेहनत की बचत इस उत्पाद का सबसे बड़ा आकर्षण है। आपको बस बर्तनों से बचा हुआ खाना हटाकर उन्हें मशीन में लगाना होता है। यह कामकाजी जोड़ों (Working Couples) के लिए एक वरदान जैसा है, क्योंकि यह घर के कामों के बोझ को कम करता है और आपको अपने परिवार के साथ बिताने के लिए अधिक समय (Quality Time) देता है।
हाइजीन (Hygiene) के मामले में डिशवॉशर बेजोड़ है। बर्तनों को धोने के बाद वे गर्म हवा (Drying Cycle) से सुखाए जाते हैं, जिससे उन पर कोई दाग या गंध नहीं रहती। हालांकि इसकी शुरुआती कीमत (Investment) थोड़ी ज्यादा लग सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपकी मेहनत कम करने और स्वच्छता बनाए रखने का एक बहुत ही प्रभावी साधन है।