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सेहरी (Sehri) वह भोजन है जो मुसलमान सुबह सादिक (Dawn) से पहले रोज़ा शुरू करने के लिए करते हैं। इस्लामी शरीयत (Islamic Sharia) में सेहरी करना सुन्नत (Sunnah) है और इसमें बरकत (Blessing) मानी गई है। सेहरी का समय (Sehri Time) समाप्त होने के बाद ही रोज़े की नीयत (Intention of Fast) की जाती है। यह भोजन न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रोज़ेदार को पूरे दिन की भूख और प्यास सहने की शारीरिक शक्ति (Physical Strength) भी प्रदान करता है।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार सेहरी के समय (Sehri Time) में देरी करना, यानी सुबह होने के ठीक पहले तक भोजन करना बेहतर माना जाता है। नबी करीम (Prophet Muhammad) ने फरमाया है कि सेहरी करो क्योंकि इसमें बरकत है। यह समय दुआओं की कबूलियत (Acceptance of Prayers) का भी होता है, जिसे तहज्जुद का वक्त (Tahajjud Time) कहा जाता है। रोज़ेदार को चाहिए कि वह इस वक्त सादा और सेहतमंद खाना (Healthy Food) खाए ताकि दिन भर इबादत (Worship) में मन लगा रहे।

सेहरी के समय (Sehri Time) के दौरान पानी का पर्याप्त सेवन (Hydration) करना बहुत ज़रूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी (Dehydration) न हो। खजूर और दूध (Dates and Milk) को सेहरी में शामिल करना सुन्नत है और यह लंबे समय तक ऊर्जा (Energy) बनाए रखता है। बहुत अधिक तला-भुना या नमकीन खाना खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे दिन में प्यास (Thirst) अधिक लगती है। अनुशासन (Discipline) के साथ वक्त का पाबंद होना ही रोज़े की रूहानियत (Spirituality) को बढ़ाता है।

भारत में सेहरी के समय (Sehri Time) का ऐलान अक्सर मस्जिदों के लाउडस्पीकर (Loudspeakers) या सायरन के माध्यम से किया जाता है। स्थानीय कैलेंडर (Local Calendar) के हिसाब से मिनटों का ध्यान रखना ज़रूरी है क्योंकि एक मिनट की देरी भी रोज़े को अमान्य (Invalid) कर सकती है। यह वक्त परिवार के सभी सदस्यों के एक साथ बैठने और रूहानी चर्चा (Spiritual Discussion) करने का एक बेहतरीन मौका होता है। सेहरी केवल पेट भरने का नाम नहीं, बल्कि अल्लाह की इबादत के लिए खुद को तैयार करना है।

सेहरी समाप्त करने के बाद रोज़े की दुआ (Sehri Dua) पढ़ना और फज्र की नमाज़ (Fajr Prayer) की तैयारी करना एक मोमिन की दिनचर्या का हिस्सा है। यह वक्त इंसान को आत्म-नियंत्रण (Self-control) और सब्र (Patience) का पाठ पढ़ाता है। जो लोग आलस्य के कारण सेहरी नहीं करते, वे एक बड़ी रूहानी बरकत (Spiritual Blessing) से महरूम रह जाते हैं। सेहरी का हर निवाला और पानी का हर घूँट अल्लाह की रहमत (Mercy of Allah) का अहसास कराता है।

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सेहरी (Sehri) वह भोजन है जो मुसलमान सुबह सादिक (Dawn) से पहले रोज़ा शुरू करने के लिए करते हैं। इस्लामी शरीयत (Islamic Sharia) में सेहरी करना सुन्नत (Sunnah) है और इसमें बरकत (Blessing) मानी गई है। सेहरी का समय (Sehri Time) समाप्त होने के बाद ही रोज़े की नीयत (Intention of Fast) की जाती है। यह भोजन न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रोज़ेदार को पूरे दिन की भूख और प्यास सहने की शारीरिक शक्ति (Physical Strength) भी प्रदान करता है।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार सेहरी के समय (Sehri Time) में देरी करना, यानी सुबह होने के ठीक पहले तक भोजन करना बेहतर माना जाता है। नबी करीम (Prophet Muhammad) ने फरमाया है कि सेहरी करो क्योंकि इसमें बरकत है। यह समय दुआओं की कबूलियत (Acceptance of Prayers) का भी होता है, जिसे तहज्जुद का वक्त (Tahajjud Time) कहा जाता है। रोज़ेदार को चाहिए कि वह इस वक्त सादा और सेहतमंद खाना (Healthy Food) खाए ताकि दिन भर इबादत (Worship) में मन लगा रहे।

सेहरी के समय (Sehri Time) के दौरान पानी का पर्याप्त सेवन (Hydration) करना बहुत ज़रूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी (Dehydration) न हो। खजूर और दूध (Dates and Milk) को सेहरी में शामिल करना सुन्नत है और यह लंबे समय तक ऊर्जा (Energy) बनाए रखता है। बहुत अधिक तला-भुना या नमकीन खाना खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे दिन में प्यास (Thirst) अधिक लगती है। अनुशासन (Discipline) के साथ वक्त का पाबंद होना ही रोज़े की रूहानियत (Spirituality) को बढ़ाता है।

भारत में सेहरी के समय (Sehri Time) का ऐलान अक्सर मस्जिदों के लाउडस्पीकर (Loudspeakers) या सायरन के माध्यम से किया जाता है। स्थानीय कैलेंडर (Local Calendar) के हिसाब से मिनटों का ध्यान रखना ज़रूरी है क्योंकि एक मिनट की देरी भी रोज़े को अमान्य (Invalid) कर सकती है। यह वक्त परिवार के सभी सदस्यों के एक साथ बैठने और रूहानी चर्चा (Spiritual Discussion) करने का एक बेहतरीन मौका होता है। सेहरी केवल पेट भरने का नाम नहीं, बल्कि अल्लाह की इबादत के लिए खुद को तैयार करना है।

सेहरी समाप्त करने के बाद रोज़े की दुआ (Sehri Dua) पढ़ना और फज्र की नमाज़ (Fajr Prayer) की तैयारी करना एक मोमिन की दिनचर्या का हिस्सा है। यह वक्त इंसान को आत्म-नियंत्रण (Self-control) और सब्र (Patience) का पाठ पढ़ाता है। जो लोग आलस्य के कारण सेहरी नहीं करते, वे एक बड़ी रूहानी बरकत (Spiritual Blessing) से महरूम रह जाते हैं। सेहरी का हर निवाला और पानी का हर घूँट अल्लाह की रहमत (Mercy of Allah) का अहसास कराता है।
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