एकीकृत बाल विकास सेवा (Integrated Child Development Services - ICDS) में आंगनवाड़ी पदों पर चयन पूरी तरह से मेरिट (Merit) के आधार पर होता है, इसमें कोई साक्षात्कार (Interview) नहीं लिया जाता। मेरिट लिस्ट (Merit List) तैयार करने के लिए उम्मीदवार के शैक्षणिक अंकों (Academic Marks) का प्रतिशत निकाला जाता है। हाई स्कूल (High School), इंटरमीडिएट (Intermediate) और स्नातक (Graduation) के अंकों को एक निश्चित वेटेज (Weightage) दिया जाता है। आमतौर पर प्रतिशत (Percentage) को 10 से विभाजित (Divide) करके प्राप्त अंकों का योग (Total) मेरिट का आधार बनता है।
श्रेणीवार आरक्षण (Category-wise Reservation) इस मेरिट सूची (Merit List) के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए अलग-अलग कट-ऑफ (Cut-off) जारी की जाती है। यदि किसी वार्ड (Ward) में आरक्षित पद रिक्त है, तो उसी श्रेणी की सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली महिला को चुना जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी (Transparent) होती है और सॉफ्टवेयर (Software) के माध्यम से संचालित की जाती है।
वरीयता (Preference) के नियमों के अनुसार, यदि दो उम्मीदवारों के शैक्षणिक अंक (Academic Marks) समान होते हैं, तो विशेष परिस्थितियों को देखा जाता है। ऐसी स्थिति में विधवा (Widow) महिला को पहली प्राथमिकता (Priority) दी जाती है। इसके पश्चात तलाकशुदा (Divorced) या गरीबी रेखा से नीचे (BPL) श्रेणी की महिला को वरीयता मिलती है। यदि ये सभी परिस्थितियाँ भी समान हैं, तो अधिक आयु (Higher Age) वाली उम्मीदवार को मेरिट में ऊपर रखा जाता है क्योंकि उनके पास सरकारी सेवा (Government Service) के अवसर कम बचे होते हैं।
अंतिम चयन सूची (Final Selection List) जारी होने से पहले एक अनंतिम मेरिट सूची (Provisional Merit List) जिला एनआईसी (NIC) की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती है। उम्मीदवारों को अपने अंकों और रैंक (Rank) की जांच करने का पूरा अवसर दिया जाता है। यदि किसी को लगता है कि अंकों की गणना (Calculation) में कोई त्रुटि हुई है, तो वे निर्धारित समय सीमा (Time Limit) के भीतर अपनी आपत्ति (Objection) दर्ज करा सकते हैं। इन आपत्तियों के निस्तारण (Disposal) के बाद ही अंतिम मेरिट लिस्ट (Final Merit List) तैयार की जाती है।
सफल उम्मीदवारों को मूल दस्तावेज सत्यापन (Original Document Verification) के लिए जिला मुख्यालय पर बुलाया जाता है। वहां उनके सभी प्रमाण पत्रों (Certificates) का मिलान ऑनलाइन भरे गए डेटा से किया जाता है। सभी विवरण सही पाए जाने पर ही नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) जारी किया जाता है। यदि कोई दस्तावेज फर्जी (Fake) पाया जाता है, तो उस उम्मीदवार का चयन तुरंत निरस्त कर दिया जाता है और प्रतीक्षा सूची (Waiting List) से अगले योग्य उम्मीदवार को मौका दिया जाता है।