वास्तु शास्त्र (Ancient Architecture) के अनुसार चंद्रमा का आधिपत्य उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण (North-West Corner) पर होता है। इस दिशा में जल का स्थान होना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि घर के इस कोने में पीने के पानी का मटका या छोटा फव्वारा (Water Fountain) लगाया जाए, तो घर के सदस्यों का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है और धन का आगमन सुचारू रहता है।
उत्तर-पश्चिम दिशा में गंदगी या कबाड़ (Scrap) जमा होने से घर में कलह की स्थिति पैदा होती है। चूंकि चंद्रमा नकदी (Cash Flow) का भी प्रतीक है, इसलिए इस दिशा के दूषित होने से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थान को खुला और हवादार (Ventilated) रखना चाहिए ताकि चंद्र की सकारात्मक ऊर्जा पूरे घर में प्रवाहित हो सके।
सफेद रंग चंद्रमा का प्रिय रंग है, इसलिए घर की दीवारों पर क्रीम या सफेद पेंट (White Paint) करवाना शांति और पवित्रता का संचार करता है। वास्तु के अनुसार, जो व्यक्ति अपने घर के वायव्य कोण में दोष रखते हैं, उन्हें अपनी माता के स्वास्थ्य की चिंता बनी रहती है। इस दिशा में सफेद फूलों के पौधे (White Flowers) लगाना भी बहुत लाभकारी होता है।
स्नानघर (Bathroom) की सफाई का चंद्रमा से गहरा संबंध है। यदि बाथरूम हमेशा गीला और गंदा रहता है, तो चंद्रमा कमजोर होता है जिससे अनावश्यक खर्च (Unnecessary Expenses) बढ़ते हैं। घर की स्त्रियों का सम्मान करने और उन्हें प्रसन्न रखने से भी घर का वास्तु दोष दूर होता है और चंद्र देव की कृपा से वंश वृद्धि (Lineage Growth) होती है।
भोजन कक्ष (Dining Room) में चंद्रमा की तस्वीर या कोई प्रतीक चिन्ह लगाना अन्न और धन की कमी नहीं होने देता। रात के समय जूठे बर्तन रसोई में छोड़ने से चंद्रमा और शनि का अशुभ योग बनता है, जो मानसिक शांति को भंग करता है। इसलिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखकर हम अपने घर के वातावरण को चंद्र ऊर्जा (Lunar Energy) के अनुकूल बना सकते हैं।