वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में राहु का संबंध दक्षिण-पश्चिम दिशा (South-West Direction) यानी नैऋत्य कोण से है। यदि आपके घर का यह हिस्सा नीचा है या वहां पानी की टंकी (Water Tank) भूमिगत बनी है, तो राहु का दोष उत्पन्न होता है। इससे घर के मुख्य सदस्य का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है और परिवार में अनावश्यक क्लेश बना रहता है। इस दिशा को हमेशा ऊंचा और भारी (Heavy) रखना चाहिए ताकि राहु की ऊर्जा स्थिर रहे।
घर की छत (Roof) पर कभी भी कूड़ा-कचरा या पुरानी लकड़ियाँ जमा न होने दें, क्योंकि राहु छत का स्वामी माना गया है। छत पर गंदगी होने से घर के बच्चों की बुद्धि (Intellect) भ्रमित होती है और उनकी पढ़ाई में रुकावटें आती हैं। वास्तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार (Main Entrance) के सामने कोई गड्ढा या गंदा नाला होना भी राहु की अशुभता को बढ़ाता है। इसे ठीक करने के लिए द्वार पर चांदी का स्वास्तिक (Silver Swastika) लगाना चाहिए।
शौचालय (Toilet) का दरवाजा हमेशा बंद रखना चाहिए और वहां स्वच्छता का विशेष ध्यान देना चाहिए। राहु गंदगी वाली जगहों पर सबसे अधिक प्रभावी होता है, इसलिए बाथरूम में कपूर की टिकिया (Camphor Tablets) रखना नकारात्मकता को सोख लेता है। घर के अंदर बंद पड़ी घड़ियाँ (Stopped Clocks) या खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान राहु की ऊर्जा को दूषित करते हैं, इसलिए उन्हें तुरंत ठीक कराएं या घर से बाहर कर दें।
नैऋत्य कोण में राहु यंत्र (Rahu Yantra) की स्थापना करना वास्तु दोषों को कम करने का एक शास्त्रीय उपाय है। घर के मंदिर में चंदन की खुशबू (Sandalwood Fragrance) का प्रयोग करें, क्योंकि चंदन राहु के जहर को शांत करने का काम करता है। घर के कोनों में नमक के पानी का पोंछा (Mop) लगाना भी अदृश्य नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाता है। इससे घर के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल और प्रेम (Love and Harmony) बढ़ता है।
सीढ़ियों (Staircase) के नीचे कभी भी रसोई या पूजा घर न बनाएं, क्योंकि यह राहु के प्रकोप को न्योता देता है। वास्तु के इन नियमों का पालन करने से राहु की छाया हटती है और भाग्य (Luck) साथ देने लगता है। जिस घर में सूर्य का प्रकाश और शुद्ध हवा का प्रवाह सही होता है, वहां राहु का प्रभाव नगण्य हो जाता है। अनुशासन (Discipline) और व्यवस्था ही राहु को शुभ बनाने की सबसे बड़ी चाबी है।