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वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार गुरु ग्रह का आधिपत्य ईशान कोण (North-East Direction) पर होता है। यह दिशा सबसे पवित्र और ऊर्जावान मानी जाती है, जिसे देवताओं का स्थान कहा गया है। यदि आपके घर का ईशान कोण भारी है या वहां शौचालय (Toilet) बना हुआ है, तो गुरु ग्रह गंभीर रूप से पीड़ित हो जाता है। इससे घर में धन का अभाव और कलह (Conflicts) की स्थिति बनी रहती है।

ईशान कोण को हमेशा खाली, स्वच्छ और जल का स्थान (Water Element) बनाना चाहिए। इस दिशा में पूजा घर (Prayer Room) स्थापित करना सबसे उत्तम होता है। सुबह के समय इस दिशा से आने वाली सूर्य की किरणें और गुरु की ऊर्जा घर के सदस्यों के मानसिक विकास (Mental Development) में सहायक होती हैं। यहां पीले रंग के फूलों के गमले रखना भी वास्तु दोषों को दूर करने में मदद करता है।

घर की उत्तर-पूर्व दिशा में भारी अलमारी या कबाड़ (Scrap) रखने से बचना चाहिए। यदि इस दिशा में निर्माण संबंधी कोई दोष है, तो वहां बृहस्पति यंत्र (Jupiter Yantra) की स्थापना करनी चाहिए। घर की दीवारों पर क्रीम या हल्का पीला पेंट (Yellow Paint) करवाना गुरु ग्रह की तरंगों को आकर्षित करता है। इससे घर के बच्चों का पढ़ाई में मन लगता है और बड़ों की निर्णय शक्ति (Decision Power) बेहतर होती है।

तिजोरी (Safe) या धन रखने के स्थान को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि उसका मुख उत्तर या पूर्व की ओर खुले। गुरु धन का कारक है, इसलिए धन के स्थान पर कुबेर यंत्र (Kuber Yantra) के साथ हल्दी की गाठें रखना शुभ माना जाता है। घर में नियमित रूप से कपूर (Camphor) जलाना और शंख बजाना नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालता है और गुरु की सात्विक ऊर्जा (Sattvic Energy) का संचार करता है।

रसोई घर (Kitchen) में चने की दाल और हल्दी को कभी भी खत्म न होने दें, क्योंकि ये वस्तुएं साक्षात गुरु का प्रतीक हैं। घर के प्रवेश द्वार (Entrance) पर आम के पत्तों का तोरण लगाना और दहलीज पर हल्दी से स्वास्तिक (Swastika) बनाना शुभता को आमंत्रित करता है। जब वास्तु और ग्रह दोनों अनुकूल होते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी सुख-सुविधाओं की कमी नहीं होती और परिवार में सदैव प्रसन्नता (Happiness) बनी रहती है।

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वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के अनुसार गुरु ग्रह का आधिपत्य ईशान कोण (North-East Direction) पर होता है। यह दिशा सबसे पवित्र और ऊर्जावान मानी जाती है, जिसे देवताओं का स्थान कहा गया है। यदि आपके घर का ईशान कोण भारी है या वहां शौचालय (Toilet) बना हुआ है, तो गुरु ग्रह गंभीर रूप से पीड़ित हो जाता है। इससे घर में धन का अभाव और कलह (Conflicts) की स्थिति बनी रहती है।

ईशान कोण को हमेशा खाली, स्वच्छ और जल का स्थान (Water Element) बनाना चाहिए। इस दिशा में पूजा घर (Prayer Room) स्थापित करना सबसे उत्तम होता है। सुबह के समय इस दिशा से आने वाली सूर्य की किरणें और गुरु की ऊर्जा घर के सदस्यों के मानसिक विकास (Mental Development) में सहायक होती हैं। यहां पीले रंग के फूलों के गमले रखना भी वास्तु दोषों को दूर करने में मदद करता है।

घर की उत्तर-पूर्व दिशा में भारी अलमारी या कबाड़ (Scrap) रखने से बचना चाहिए। यदि इस दिशा में निर्माण संबंधी कोई दोष है, तो वहां बृहस्पति यंत्र (Jupiter Yantra) की स्थापना करनी चाहिए। घर की दीवारों पर क्रीम या हल्का पीला पेंट (Yellow Paint) करवाना गुरु ग्रह की तरंगों को आकर्षित करता है। इससे घर के बच्चों का पढ़ाई में मन लगता है और बड़ों की निर्णय शक्ति (Decision Power) बेहतर होती है।

तिजोरी (Safe) या धन रखने के स्थान को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि उसका मुख उत्तर या पूर्व की ओर खुले। गुरु धन का कारक है, इसलिए धन के स्थान पर कुबेर यंत्र (Kuber Yantra) के साथ हल्दी की गाठें रखना शुभ माना जाता है। घर में नियमित रूप से कपूर (Camphor) जलाना और शंख बजाना नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालता है और गुरु की सात्विक ऊर्जा (Sattvic Energy) का संचार करता है।

रसोई घर (Kitchen) में चने की दाल और हल्दी को कभी भी खत्म न होने दें, क्योंकि ये वस्तुएं साक्षात गुरु का प्रतीक हैं। घर के प्रवेश द्वार (Entrance) पर आम के पत्तों का तोरण लगाना और दहलीज पर हल्दी से स्वास्तिक (Swastika) बनाना शुभता को आमंत्रित करता है। जब वास्तु और ग्रह दोनों अनुकूल होते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी सुख-सुविधाओं की कमी नहीं होती और परिवार में सदैव प्रसन्नता (Happiness) बनी रहती है।
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