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उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का चयन पूरी तरह से मेरिट आधारित प्रक्रिया (Merit-Based Process) द्वारा किया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा (Written Exam) या साक्षात्कार (Interview) का आयोजन नहीं होता है। चयन का मुख्य आधार अभ्यर्थी के शैक्षणिक अंकों का प्रतिशत (Percentage of Marks) होता है। सबसे पहले आवेदिकाओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच की जाती है और फिर उनके हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकों को जोड़कर एक मेरिट तैयार की जाती है।

मेरिट सूची तैयार करने के लिए एक विशेष अंकन प्रणाली (Scoring System) अपनाई जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी अभ्यर्थी के 10वीं में 60% अंक हैं, तो उसे 6 अंक (60/10) दिए जाते हैं। इसी प्रकार 12वीं के अंकों को भी 10 से विभाजित करके अंक निकाले जाते हैं। ग्रेजुएशन (Graduation) या पोस्ट ग्रेजुएशन के अंकों को अब मेरिट में सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जाता है, लेकिन उच्च योग्यता (Higher Qualification) होने पर समान अंक आने की स्थिति में उस अभ्यर्थी को वरीयता मिल सकती है।

आरक्षण नियमों (Reservation Rules) का पालन करते हुए जिलेवार और ब्लॉकवार मेरिट सूची (District-wise Merit List) तैयार की जाती है। विभाग द्वारा एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्वचालित रूप से वरीयता सूची बनाई जाती है ताकि पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे। सबसे पहले संबंधित ग्राम सभा की विधवा महिलाओं को रखा जाता है, उसके बाद तलाकशुदा महिलाओं को और फिर बीपीएल परिवारों (BPL Families) की पात्र युवतियों को स्थान दिया जाता है। इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम होती है।

एक बार मेरिट सूची तैयार हो जाने के बाद, इसे जिले के संबंधित विभाग की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित किया जाता है। यदि किसी अभ्यर्थी को अपनी रैंक या अंकों पर कोई आपत्ति (Objection) है, तो वह निर्धारित समय के भीतर सुधार के लिए आवेदन कर सकता है। सभी आपत्तियों के निस्तारण (Disposal of Objections) के बाद ही अंतिम चयन सूची (Final Selection List) जारी की जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और जिला स्तरीय चयन समिति (District Selection Committee) की निगरानी में होती है।

अंतिम रूप से चयनित महिलाओं को नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) जारी करने से पहले उनके सभी अभिलेखों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाता है। फर्जी डिग्री या गलत आय प्रमाण पत्र देने वाली महिलाओं के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। नियुक्ति के पश्चात इन कार्यकर्ताओं को उनके आवंटित केंद्रों (Allocated Centers) पर कार्यभार संभालना होता है। यह मेरिट प्रणाली योग्य और जरूरतमंद महिलाओं को सीधे सेवा का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है।

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उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का चयन पूरी तरह से मेरिट आधारित प्रक्रिया (Merit-Based Process) द्वारा किया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा (Written Exam) या साक्षात्कार (Interview) का आयोजन नहीं होता है। चयन का मुख्य आधार अभ्यर्थी के शैक्षणिक अंकों का प्रतिशत (Percentage of Marks) होता है। सबसे पहले आवेदिकाओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की जांच की जाती है और फिर उनके हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकों को जोड़कर एक मेरिट तैयार की जाती है।

मेरिट सूची तैयार करने के लिए एक विशेष अंकन प्रणाली (Scoring System) अपनाई जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी अभ्यर्थी के 10वीं में 60% अंक हैं, तो उसे 6 अंक (60/10) दिए जाते हैं। इसी प्रकार 12वीं के अंकों को भी 10 से विभाजित करके अंक निकाले जाते हैं। ग्रेजुएशन (Graduation) या पोस्ट ग्रेजुएशन के अंकों को अब मेरिट में सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जाता है, लेकिन उच्च योग्यता (Higher Qualification) होने पर समान अंक आने की स्थिति में उस अभ्यर्थी को वरीयता मिल सकती है।

आरक्षण नियमों (Reservation Rules) का पालन करते हुए जिलेवार और ब्लॉकवार मेरिट सूची (District-wise Merit List) तैयार की जाती है। विभाग द्वारा एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्वचालित रूप से वरीयता सूची बनाई जाती है ताकि पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे। सबसे पहले संबंधित ग्राम सभा की विधवा महिलाओं को रखा जाता है, उसके बाद तलाकशुदा महिलाओं को और फिर बीपीएल परिवारों (BPL Families) की पात्र युवतियों को स्थान दिया जाता है। इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम होती है।

एक बार मेरिट सूची तैयार हो जाने के बाद, इसे जिले के संबंधित विभाग की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित किया जाता है। यदि किसी अभ्यर्थी को अपनी रैंक या अंकों पर कोई आपत्ति (Objection) है, तो वह निर्धारित समय के भीतर सुधार के लिए आवेदन कर सकता है। सभी आपत्तियों के निस्तारण (Disposal of Objections) के बाद ही अंतिम चयन सूची (Final Selection List) जारी की जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और जिला स्तरीय चयन समिति (District Selection Committee) की निगरानी में होती है।

अंतिम रूप से चयनित महिलाओं को नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) जारी करने से पहले उनके सभी अभिलेखों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाता है। फर्जी डिग्री या गलत आय प्रमाण पत्र देने वाली महिलाओं के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। नियुक्ति के पश्चात इन कार्यकर्ताओं को उनके आवंटित केंद्रों (Allocated Centers) पर कार्यभार संभालना होता है। यह मेरिट प्रणाली योग्य और जरूरतमंद महिलाओं को सीधे सेवा का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
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