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हवाई जहाज के टायर (Aeroplane Tyres) आम गाड़ियों के टायरों से बिल्कुल अलग और बहुत अधिक शक्तिशाली होते हैं। जब एक विमान लैंड (Landing) करता है, तो उसकी रफ्तार 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच होती है और उस पर सैकड़ों टन का वजन (Load) होता है। इन टायरों को बनाने के लिए प्राकृतिक रबर (Natural Rubber), नायलॉन और केवलर (Kevlar) जैसे बहुत मजबूत सिंथेटिक फाइबर का उपयोग किया जाता है, जो इन्हें फटने से बचाते हैं।

इन टायरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें साधारण हवा के बजाय नाइट्रोजन गैस (Nitrogen Gas) भरी जाती है। नाइट्रोजन एक निष्क्रिय गैस (Inert Gas) है जो तापमान में भारी बदलाव होने पर भी अपने दबाव (Pressure) को स्थिर रखती है। लैंडिंग के समय घर्षण के कारण टायर बहुत गर्म हो जाते हैं, और यदि इनमें साधारण हवा होती, तो वह फैलकर टायर को फाड़ सकती थी या आग पकड़ सकती थी। नाइट्रोजन का उपयोग आग लगने के खतरे (Fire Risk) को भी कम करता है।

हवाई जहाज के टायरों में साधारण टायरों की तरह 'पैटर्न' या डिजाइन नहीं होते, बल्कि उनमें सीधी रेखाएं (Grooves) होती हैं। ये रेखाएं मुख्य रूप से गीली रनवे (Wet Runway) पर पानी को बाहर निकालने के लिए होती हैं ताकि टायर फिसले नहीं। इन टायरों को अत्यधिक उच्च दबाव (High Pressure) पर फुलाया जाता है, जो एक कार के टायर की तुलना में लगभग छह गुना अधिक होता है। यही दबाव उन्हें विमान के भारी वजन को सहने की ताकत (Load Bearing Capacity) देता है।

एक और तकनीकी बात यह है कि इन टायरों का परीक्षण (Testing) बहुत कड़े मानकों पर किया जाता है। एक टायर को तब तक सुरक्षित माना जाता है जब तक कि वह अपनी निर्धारित लैंडिंग संख्या (Landing Cycles) पूरी न कर ले। इसके बाद टायरों की रिट्रेडिंग (Retreading) की जाती है, यानी उन पर रबर की नई परत चढ़ाई जाती है। एक हवाई जहाज का टायर लगभग 200 से 250 बार सुरक्षित रूप से लैंडिंग कर सकता है।

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग (Aerospace Engineering) में सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होती है। टायरों के भीतर विशेष फ्यूज प्लग (Fuse Plugs) भी लगे होते हैं जो तापमान बहुत अधिक बढ़ने पर अपने आप पिघल जाते हैं और टायर की गैस धीरे से बाहर निकाल देते हैं, जिससे विस्फोट (Explosion) नहीं होता। यह सूक्ष्म तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले मटेरियल (Material Quality) का ही परिणाम है कि आसमान से उतरता हुआ विशाल विमान सुरक्षित रूप से जमीन पर रुक पाता है।

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हवाई जहाज के टायर (Aeroplane Tyres) आम गाड़ियों के टायरों से बिल्कुल अलग और बहुत अधिक शक्तिशाली होते हैं। जब एक विमान लैंड (Landing) करता है, तो उसकी रफ्तार 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच होती है और उस पर सैकड़ों टन का वजन (Load) होता है। इन टायरों को बनाने के लिए प्राकृतिक रबर (Natural Rubber), नायलॉन और केवलर (Kevlar) जैसे बहुत मजबूत सिंथेटिक फाइबर का उपयोग किया जाता है, जो इन्हें फटने से बचाते हैं।

इन टायरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें साधारण हवा के बजाय नाइट्रोजन गैस (Nitrogen Gas) भरी जाती है। नाइट्रोजन एक निष्क्रिय गैस (Inert Gas) है जो तापमान में भारी बदलाव होने पर भी अपने दबाव (Pressure) को स्थिर रखती है। लैंडिंग के समय घर्षण के कारण टायर बहुत गर्म हो जाते हैं, और यदि इनमें साधारण हवा होती, तो वह फैलकर टायर को फाड़ सकती थी या आग पकड़ सकती थी। नाइट्रोजन का उपयोग आग लगने के खतरे (Fire Risk) को भी कम करता है।

हवाई जहाज के टायरों में साधारण टायरों की तरह 'पैटर्न' या डिजाइन नहीं होते, बल्कि उनमें सीधी रेखाएं (Grooves) होती हैं। ये रेखाएं मुख्य रूप से गीली रनवे (Wet Runway) पर पानी को बाहर निकालने के लिए होती हैं ताकि टायर फिसले नहीं। इन टायरों को अत्यधिक उच्च दबाव (High Pressure) पर फुलाया जाता है, जो एक कार के टायर की तुलना में लगभग छह गुना अधिक होता है। यही दबाव उन्हें विमान के भारी वजन को सहने की ताकत (Load Bearing Capacity) देता है।

एक और तकनीकी बात यह है कि इन टायरों का परीक्षण (Testing) बहुत कड़े मानकों पर किया जाता है। एक टायर को तब तक सुरक्षित माना जाता है जब तक कि वह अपनी निर्धारित लैंडिंग संख्या (Landing Cycles) पूरी न कर ले। इसके बाद टायरों की रिट्रेडिंग (Retreading) की जाती है, यानी उन पर रबर की नई परत चढ़ाई जाती है। एक हवाई जहाज का टायर लगभग 200 से 250 बार सुरक्षित रूप से लैंडिंग कर सकता है।

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग (Aerospace Engineering) में सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होती है। टायरों के भीतर विशेष फ्यूज प्लग (Fuse Plugs) भी लगे होते हैं जो तापमान बहुत अधिक बढ़ने पर अपने आप पिघल जाते हैं और टायर की गैस धीरे से बाहर निकाल देते हैं, जिससे विस्फोट (Explosion) नहीं होता। यह सूक्ष्म तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले मटेरियल (Material Quality) का ही परिणाम है कि आसमान से उतरता हुआ विशाल विमान सुरक्षित रूप से जमीन पर रुक पाता है।
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