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भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र (Unorganised Sector) में काम करता है, जिसमें निर्माण मजदूर, कृषि श्रमिक और रेहड़ी-पटरी वाले शामिल हैं। इन लोगों को अक्सर संगठित क्षेत्र (Organised Sector) की तरह लिखित अनुबंध (Contract) या निश्चित छुट्टियां नहीं मिलतीं। हालांकि, भारतीय कानून इन्हें भी न्यूनतम मजदूरी पाने और सुरक्षित कार्य वातावरण का अधिकार देता है। इन श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार ने अब डेटाबेस बनाना शुरू किया है।

ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल की शुरुआत असंगठित कामगारों को एक विशिष्ट पहचान (Unique Identity) देने के लिए की गई है। इस पोर्टल पर पंजीकरण करने के बाद प्रत्येक श्रमिक को एक ई-श्रम कार्ड जारी किया जाता है जिसमें 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) होता है। यह कार्ड पूरे देश में मान्य है, जिससे प्रवासी श्रमिकों (Migrant Workers) को एक राज्य से दूसरे राज्य जाने पर भी अपनी पहचान साबित करने में आसानी होती है। यह डिजिटल कदम (Digital Step) उनके सशक्तिकरण के लिए उठाया गया है।

इस कार्ड का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं (Government Schemes) का पैसा सीधे बैंक खाते में पहुँचाया जा सकता है। आपातकालीन स्थितियों (Emergency Situations) जैसे महामारी या प्राकृतिक आपदा के समय सरकार इन पंजीकृत श्रमिकों को आर्थिक सहायता (Financial Aid) प्रदान करती है। पंजीकरण के साथ ही श्रमिकों को 2 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा (Accidental Insurance) भी मुफ्त मिलता है। इससे गरीब परिवारों को आकस्मिक संकट के समय बड़ी मदद मिलती है।

भविष्य में, ई-श्रम डेटाबेस का उपयोग श्रमिकों को कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) और रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए किया जाएगा। यह पोर्टल श्रमिकों के कौशल की मैपिंग (Skill Mapping) करता है जिससे नियोक्ताओं को सही कामगार खोजने में मदद मिलती है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को अब राशन कार्ड और अन्य कल्याणकारी लाभों (Welfare Benefits) के लिए भटकना नहीं पड़ता क्योंकि उनका डेटा केंद्र सरकार के पास सुरक्षित है।

इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना ही वास्तविक न्याय है। ई-श्रम कार्ड धारकों को भविष्य में पेंशन योजनाओं और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा जैसी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। अधिकार केवल कागजों पर न रहकर जमीन पर पहुँचें, इसके लिए जागरूकता (Awareness) बढ़ाना जरूरी है। हर मजदूर का हक है कि उसे सरकार की नजर में पहचान मिले और उसके श्रम का सम्मान हो।

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भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र (Unorganised Sector) में काम करता है, जिसमें निर्माण मजदूर, कृषि श्रमिक और रेहड़ी-पटरी वाले शामिल हैं। इन लोगों को अक्सर संगठित क्षेत्र (Organised Sector) की तरह लिखित अनुबंध (Contract) या निश्चित छुट्टियां नहीं मिलतीं। हालांकि, भारतीय कानून इन्हें भी न्यूनतम मजदूरी पाने और सुरक्षित कार्य वातावरण का अधिकार देता है। इन श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार ने अब डेटाबेस बनाना शुरू किया है।

ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल की शुरुआत असंगठित कामगारों को एक विशिष्ट पहचान (Unique Identity) देने के लिए की गई है। इस पोर्टल पर पंजीकरण करने के बाद प्रत्येक श्रमिक को एक ई-श्रम कार्ड जारी किया जाता है जिसमें 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) होता है। यह कार्ड पूरे देश में मान्य है, जिससे प्रवासी श्रमिकों (Migrant Workers) को एक राज्य से दूसरे राज्य जाने पर भी अपनी पहचान साबित करने में आसानी होती है। यह डिजिटल कदम (Digital Step) उनके सशक्तिकरण के लिए उठाया गया है।

इस कार्ड का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं (Government Schemes) का पैसा सीधे बैंक खाते में पहुँचाया जा सकता है। आपातकालीन स्थितियों (Emergency Situations) जैसे महामारी या प्राकृतिक आपदा के समय सरकार इन पंजीकृत श्रमिकों को आर्थिक सहायता (Financial Aid) प्रदान करती है। पंजीकरण के साथ ही श्रमिकों को 2 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा (Accidental Insurance) भी मुफ्त मिलता है। इससे गरीब परिवारों को आकस्मिक संकट के समय बड़ी मदद मिलती है।

भविष्य में, ई-श्रम डेटाबेस का उपयोग श्रमिकों को कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) और रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए किया जाएगा। यह पोर्टल श्रमिकों के कौशल की मैपिंग (Skill Mapping) करता है जिससे नियोक्ताओं को सही कामगार खोजने में मदद मिलती है। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को अब राशन कार्ड और अन्य कल्याणकारी लाभों (Welfare Benefits) के लिए भटकना नहीं पड़ता क्योंकि उनका डेटा केंद्र सरकार के पास सुरक्षित है।

इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना ही वास्तविक न्याय है। ई-श्रम कार्ड धारकों को भविष्य में पेंशन योजनाओं और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा जैसी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। अधिकार केवल कागजों पर न रहकर जमीन पर पहुँचें, इसके लिए जागरूकता (Awareness) बढ़ाना जरूरी है। हर मजदूर का हक है कि उसे सरकार की नजर में पहचान मिले और उसके श्रम का सम्मान हो।
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